डेस्क : कनाडा में खालिस्तानी समर्थकों की गतिविधियों को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। ब्रैम्पटन में भारतीय उच्चायुक्त दिनेश पटनायक के काफिले को प्रदर्शनकारियों द्वारा रोकने की कोशिश किए जाने और भारतीय तिरंगे के कथित अपमान की घटना सामने आने के बाद दोनों देशों के संबंधों को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।
बताया जा रहा है कि यह घटना 26 मई को ब्रैम्पटन स्थित पियर्सन कन्वेंशन सेंटर के बाहर हुई। प्रत्यक्षदर्शियों और सामने आए वीडियो में कुछ प्रदर्शनकारी खालिस्तान समर्थक झंडे और बैनर लेकर भारतीय राजनयिक के काफिले के निकट पहुंचते दिखाई दिए। प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए काफिले का रास्ता रोकने का प्रयास किया।
घटना के दौरान भारतीय तिरंगे के अपमान का भी आरोप लगा है। रिपोर्टों के अनुसार, कुछ उपद्रवियों ने तिरंगे को नुकसान पहुंचाया, जिसके बाद भारतीय समुदाय में नाराजगी देखी जा रही है। इस दौरान मौके पर मौजूद कनाडाई पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। आरोप है कि पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास तो किया, लेकिन किसी प्रकार की सख्त कार्रवाई तत्काल नहीं की गई।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब भारत और कनाडा के बीच संबंधों को सामान्य बनाने की कोशिशें जारी हैं। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल भी इन दिनों कनाडा दौरे पर हैं, जहां व्यापार और द्विपक्षीय सहयोग को लेकर चर्चा चल रही है।
गौरतलब है कि वर्ष 2023 में खालिस्तानी समर्थक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद भारत और कनाडा के संबंधों में तनाव बढ़ गया था। कनाडा के तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत पर गंभीर आरोप लगाए थे, जिन्हें नई दिल्ली ने पूरी तरह खारिज कर दिया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच राजनयिक विवाद और निष्कासन की घटनाएं भी हुई थीं।
सूत्रों के अनुसार, कनाडा में सक्रिय खालिस्तानी समूहों की गतिविधियों को लेकर भारतीय समुदाय लंबे समय से चिंता जताता रहा है। हालिया घटना ने एक बार फिर वहां भारतीय राजनयिकों और भारतीय समुदाय की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।













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