नई दिल्ली : संसद में सरकार ने लोकसभा की संरचना और भविष्य की चुनावी व्यवस्था को लेकर एक महत्वपूर्ण जानकारी दी है। सरकार के अनुसार प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया के बाद लोकसभा की कुल सीटें बढ़ाकर 815 की जा सकती हैं। इसके साथ ही महिला प्रतिनिधित्व को मजबूत करने के लिए 272 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित रखने का प्रस्ताव भी सामने रखा गया है।
यह जानकारी संसद में कानून मंत्री द्वारा दिए गए बयान के दौरान सामने आई, जिसमें उन्होंने बताया कि महिला आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया परिसीमन और जनगणना के बाद आगे बढ़ेगी। वर्तमान में लोकसभा की कुल 543 सीटें हैं, जिन्हें बढ़ाकर लगभग 50 प्रतिशत तक विस्तार देने की योजना पर चर्चा हो रही है।
सरकार का कहना है कि सीटों में यह वृद्धि सभी राज्यों में समान अनुपात के आधार पर की जाएगी, ताकि किसी भी राज्य के प्रतिनिधित्व के साथ असंतुलन न हो। इस कदम का उद्देश्य संसद में जनसंख्या के अनुसार बेहतर प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना बताया गया है।
महिला आरक्षण के तहत प्रस्तावित 272 सीटें लोकसभा में लगभग एक-तिहाई हिस्सेदारी सुनिश्चित करेंगी। इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि इस प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। कई विपक्षी दलों ने परिसीमन की प्रक्रिया और इसके समय को लेकर सवाल उठाए हैं। विशेषकर दक्षिण भारत के कुछ राज्यों को आशंका है कि जनसंख्या आधारित परिसीमन से उनके संसदीय प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है।
सरकार ने इन चिंताओं को खारिज करते हुए कहा है कि पूरी प्रक्रिया संतुलित तरीके से लागू की जाएगी और किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं होगा।













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