डेस्क: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर ने जयपुर के कनोडिया कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम ‘भारत का भविष्य: छद्म हिंदुत्व या धर्मनिरपेक्ष भारत?’ में हिन्दुत्व और धर्मनिरपेक्षता को लेकर विवादित बयान दिए हैं। उन्होंने ट्रिपल तलाक के मुद्दे और हिन्दू, सिख और मुस्लिम विवाह प्रथाओं पर अपनी राय रखते हुए चर्चा छेड़ी।
अय्यर ने कहा, “हमारे प्रधानमंत्री सभी शंकराचार्यों को दरकिनार कर स्वयं राम मंदिर का उद्घाटन कर रहे हैं। क्या यह धर्मनिरपेक्षता है? प्रधानमंत्री का कोई धर्म नहीं होना चाहिए, लेकिन उन्होंने इस नियम का उल्लंघन किया। यदि आपका हिंदुत्व केवल मुसलमानों को इस्लाम से बचाने तक सीमित है, जैसे कि तीन तलाक पर प्रतिबंध लगाने के बहाने, तो पहले यह देखिए कि कितने मुस्लिम विवाह तीन तलाक के कारण टूटते हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “कुरान कहता है कि चार पत्नियों का विवाह तभी संभव है जब सभी का समान रूप से ध्यान रखा जा सके। सभी जानते हैं कि यह मुश्किल है। जबकि गोपाल सिंह जांच समिति के निष्कर्ष के अनुसार, हिंदू और सिख अक्सर दो पत्नियां रखते हैं, मुस्लिम कम करते हैं। ऐसे में यह कहना कि तीन तलाक पर प्रतिबंध लगाकर मुस्लिम महिलाओं को आजाद किया गया, धर्मनिरपेक्षता और हिंदुत्व की सही तस्वीर नहीं दिखाता। इसे ‘छद्म हिंदुत्व’ कहा जा सकता है। वहीं, ‘लव जिहाद’ को लेकर उन्होंने सवाल उठाया और कहा, ‘प्यार में कोई जिहाद नहीं हो सकता। जिहाद बदला लेने का काम है, प्यार कभी बदले की भावना नहीं रखता।’
अय्यर ने यह भी चेतावनी दी कि भारत को ‘हिंदू राष्ट्र’ के रूप में स्थापित करने और मुसलमानों को दुश्मन के रूप में पेश करने की कोशिशें देश के लिए खतरनाक साबित हो सकती हैं। उन्होंने कहा, “यदि किसी समुदाय को बाहर रखने की नींव पर देश खड़ा किया गया, तो भारत टिक नहीं पाएगा। हिंदुओं की बड़ी संख्या है, लेकिन मुसलमान सबसे बड़ा अल्पसंख्यक समूह हैं और पांच करोड़ लोग अन्य धर्मों के अनुयायी हैं। ऐसे में भारत को केवल ‘हिंदू राष्ट्र’ कहना और मुसलमानों को दुश्मन दिखाना देश को कम से कम 43 अलग-अलग राज्यों में विभाजित कर देगा।”
अय्यर ने पाकिस्तान के साथ संवाद जारी रखने की वकालत करते हुए कहा कि धार्मिक विविधता ही भारत की ताकत है, और इस पर आधारित ही देश स्थिर रह सकता है।













मुख्य समाचार
देश
राज्य-शहर
विदेश
बिजनेस
मनोरंजन
जीवंत

