डेस्क : बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने आज पार्टी के संस्थापक मान्यवर श्री कांशीराम जी की जयंती पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर उन्होंने विपक्षी दलों, विशेषकर समाजवादी पार्टी (सपा), भाजपा और कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा और वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की।
विपक्ष का ‘पीडीए’ नारा है केवल छलावा
मायावती ने सपा के ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) नारे को चुनावी स्वार्थ से प्रेरित और विशुद्ध छलावा बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा, कांग्रेस और भाजपा जैसी पार्टियाँ दलितों, पिछड़ों और मुस्लिमों का केवल चुनाव तक ही इस्तेमाल करती हैं और चुनाव समाप्त होते ही उन्हें तिरस्कृत कर देती हैं। मायावती ने कहा कि मुस्लिम समाज के कुछ वर्गों के बसपा से जुड़ने और ब्राह्मण समाज के समर्थन के कारण सपा की राजनीतिक और जातिवादी शत्रुता और गहरी हो गई है।
कांशीराम को ‘भारतरत्न’ देने की मांग
पूर्व मुख्यमंत्री ने केंद्र की भाजपा सरकार से आग्रह किया कि मान्यवर श्री कांशीराम जी को ‘भारतरत्न’ से सम्मानित करने में और देरी न की जाए। उन्होंने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि जैसे कांग्रेस ने बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर को लंबे समय तक भारतरत्न से वंचित रखा, वैसा ही रवैया वर्तमान सरकार कांशीराम जी के प्रति अपना रही है। मायावती ने कहा कि कांशीराम जी का योगदान देश में समतामूलक समाज के निर्माण में ऐतिहासिक और अमूल्य है।
नाम बदलने की राजनीति पर नाराजगी
मायावती ने प्रदेश की वर्तमान और पूर्ववर्ती सरकारों पर महापुरुषों के नाम पर बने स्मारकों, जिलों और संस्थानों के नाम बदलने का आरोप लगाया। उन्होंने लखनऊ में स्थापित ‘मान्यवर श्री कांशीराम जी उर्दू, अरबी, फारसी विश्वविद्यालय’ का नाम बदलकर ‘भाषा विश्वविद्यालय’ करने का उदाहरण दिया और इसे उनके महत्व को समाप्त करने वाली संकीर्ण मानसिकता बताया। इसी तरह उन्होंने सहारनपुर के अस्पताल और ‘मान्यवर श्री कांशीराम नगर’ जिले के नाम बदलने पर भी अपनी आपत्ति जताई।
सत्ता की मास्टर चाबी की ओर आह्वान
मायावती ने बहुजन समाज के लोगों से अपील की कि वे बसपा से जुड़कर सच्चे मिशनरी अंबेडकरवादी बनें और अपनी वोट की शक्ति का उपयोग कर ‘सत्ता की मास्टर चाबी’ प्राप्त करें। उन्होंने कहा कि केवल सत्ता हासिल करके ही संविधान में प्रदत्त अधिकारों को जमीन पर लागू किया जा सकता है और जीवन में गुलामी व लाचारी से मुक्ति संभव है। मायावती ने आगाह किया कि प्रलोभन देकर वोट की शक्ति को कमजोर करने वाली पार्टियों और निजी स्वार्थ के लिए दगा करने वालों से सतर्क रहना अति आवश्यक है।













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