डेस्क: राज्यसभा में उपनेता के पद से हटाए जाने के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता राघव चड्ढा ने पार्टी नेतृत्व पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने एक वीडियो जारी कर अपनी नाराजगी जाहिर की और कहा कि जनता के मुद्दे उठाने पर उन्हें बोलने से रोकने की कोशिश की जा रही है।
राघव चड्ढा ने शायराना अंदाज में अपनी बात रखते हुए कहा, “मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझ लेना। मैं वो दरिया हूं जो वक्त आने पर सैलाब बनता है।” उनके इस बयान को पार्टी के भीतर बढ़ते मतभेदों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
“क्या जनता के मुद्दे उठाना अपराध है?”
चड्ढा ने कहा कि जब-जब उन्हें संसद में बोलने का मौका मिला, उन्होंने आम जनता से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता दी। उन्होंने सवाल उठाया, “क्या जनता के मुद्दे उठाना कोई अपराध है? क्या मैंने कोई गलती कर दी है?”
उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर उनके संसद में बोलने पर रोक लगाने की मांग की है।
पार्टी नेतृत्व पर सीधे सवाल
राघव चड्ढा ने कहा कि उनके बोलने पर रोक लगाने की कोशिश समझ से परे है। उन्होंने बताया कि उन्होंने संसद में एयरपोर्ट पर महंगे खाने, जोमैटो डिलीवरी कर्मियों की समस्याओं, टोल प्लाजा शुल्क, बैंक चार्जेज और साल में 13 बार रिचार्ज जैसे मुद्दे उठाए।
उन्होंने कहा, “इन मुद्दों से आम आदमी को फायदा हुआ, लेकिन इससे पार्टी को क्या नुकसान हुआ कि मुझे बोलने से रोका जा रहा है?”
जनता के नाम संदेश
अपने संदेश के अंत में चड्ढा ने जनता का आभार जताते हुए कहा कि वे हमेशा लोगों के लिए खड़े रहेंगे। उन्होंने कहा, “मैं आपसे हूं और आप के लिए हूं। आप मेरा साथ बनाए रखिए।”
उन्होंने दोहराया, “मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझ लेना, मैं वो दरिया हूं जो वक्त आने पर सैलाब बनता है।”
यह बयान आम आदमी पार्टी के भीतर संभावित अंदरूनी मतभेदों की ओर इशारा करता है, जिसका असर आने वाले समय में पार्टी की राजनीति पर पड़ सकता है।












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