नई दिल्ली:दिल्ली की लाइफलाइन बन चुकी मेट्रो पहले से ज्यादा सुरक्षित होती जा रही है। मेट्रो प्रबंधन की सतर्कता और एहतियात के चलते मेट्रो ट्रेन के सामने कूद कर आत्महत्या करने के मामलों में भी कमी आई है। मेट्रो प्रबंधन का कहना है कि पीएसडी गेट और ज्यादा सुरक्षाकर्मियों की तैनाती के चलते मेट्रो के सामने कूदने वाले लोगों को समय रहते ही बचाया जा रहा है।
मेट्रो स्टेशन पर लोगों के आत्महत्या करने के मामलों का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2014 से 2018 के बीच चार साल में 80 लोगों ने ट्रैक पर कूदकर आत्महत्या की थी। जनवरी 2018 से लेकर मई 2019 में 25 लोगों ने मेट्रो के सामने कूदकर अपनी जान दी।
लगातार बढ़ते मामलों के बाद मेट्रो प्रबंधन ने स्टेशनों पर गेट लगाने की घोषणा की थी। एक आरटीआई के जवाब में मेट्रो पुलिस ने बताया कि वर्ष 2017 में 16 लोगों ने मेट्रो स्टेशन पर आत्महत्या की थी। वहीं जानकारी के अनुसारी वर्ष 2022 के पहले 132 दिनों में आत्महत्या के 3 मामले सामने आए हैं।
छह मेट्रो स्टेशन चिन्हित किए
मेट्रो प्रबंधन ने उन मेट्रो स्टेशनों को चिन्हित किया, जहां आत्महत्या के मामले ज्यादा आए। इन स्टेशनों चांदनी चौक, चावड़ी बाजार, राजीव चौक, पटेल चौक और केन्द्रीय सचिवालय की पहचान के बाद यहां पीएसडी गेट लगाए।
यह कदम भी उठाए गए
गश्त बढ़ाई गई
मेट्रो स्टेशन की सुरक्षा का जिम्मा संभालने का काम करने वाली सीआईएसएफ कर्मचारियों की गश्त स्टेशन पर बढ़ाई गई। सीआईएसएफ कर्मी सुरक्षा करने के साथ ही अब स्टेशनों पर मौजूद लोगों पर नजर रखने के साथ ही प्लेटफॉर्म पर भी सक्रिय रहते हैं।
पूर्व सैनिकों की नियुक्ति
आत्महत्या को रोकने के लिए प्लेटफॉर्म पर सेना से सेवानिवृत्त लोगों की नियुक्ति की गई। सौ से ज्यादा कर्मचारियों को लोगों पर नजर रखने के लिए स्टेशनों पर तैनात किया गया। किसी भी व्यक्ति की संदिग्ध हरकत या फिर ट्रेक पर कूदने के समय यह लोग तुंरत कार्यवाई करते हैं। इसके चलते कई मामलों में लोगों की जान बचाई जा सकी है।













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