जयपुर : राजधानी जयपुर में आयोजित एक आध्यात्मिक कार्यक्रम में मुनि श्री तत्त्व रुचि जी “तरुण” ने जीवन की अनिश्चितता और समय के सदुपयोग पर गहन संदेश देते हुए कहा कि मनुष्य को अपने आवश्यक कार्यों को कल पर टालने की प्रवृत्ति त्यागनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि “कल को ‘ना’ और आज को ‘हाँ’ कहो, क्योंकि कल का कोई भरोसा नहीं होता।”
मुनि श्री ने प्रवचन में कहा कि मनुष्य सामान्यतः उसी को ‘हाँ’ कहता है, जिस पर उसे विश्वास होता है। किंतु जीवन स्वयं ही सांसों पर आधारित है और सांसों की निरंतरता का कोई भरोसा नहीं है। यह कोई नहीं जानता कि जीवन का प्रवाह कब रुक जाए। ऐसे में जो कार्य आज किए जा सकते हैं, उन्हें कल के लिए टालना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि जीवन की सबसे बड़ी सच्चाई उसकी अनिश्चितता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को वर्तमान क्षण का सदुपयोग करते हुए अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना चाहिए।
इस अवसर पर मुनि श्री संभव कुमार जी ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि इस संसार में मृत्यु के अतिरिक्त कुछ भी निश्चित नहीं है। मृत्यु अवश्यंभावी है और उससे बच पाना संभव नहीं। उन्होंने कहा कि केवल वही व्यक्ति कल पर भरोसा कर सकता है, जिसे यह विश्वास हो कि वह कभी नहीं मरेगा या जिसने मृत्यु को साध लिया हो—परंतु यह स्थिति अत्यंत दुर्लभ है। इसलिए समय का एक क्षण भी प्रमाद में गंवाना हितकारी नहीं है।
कार्यक्रम के प्रारंभ में तीर्थंकर धर्म प्रभु की स्तुति की गई। संतों ने उपस्थित श्रद्धालुओं को प्रेक्षाध्यान, तप और त्याग के माध्यम से आध्यात्मिक लाभ प्रदान किया। अंत में मंगलपाठ के साथ सभा का समापन हुआ।













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