नई दिल्ली। एनपीएस को लेकर कर्मचारियों की चिंता और डर को दूर करने के लिए केंद्र सरकार एक और कदम उठाने जा रही है। मोदी सरकार राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) का हिस्सा बनने वाले केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों को पेंशन के रूप में उनके अंतिम वेतन का 50 फीसद देने की गारंटी देने की सोच रही है।
OPS और NPS में क्या है अंतर: ओल्ड पेंशन स्कीम के तहत कर्मचारी को जीवन भर के लिए पेंशन के रूप में अंतिम सैलरी का आधा हिस्सा मिलता है और वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप समायोजन के अधीन है। इसके विपरीत NPS एक योगदान योजना है, जहां एक सरकारी कर्मचारी अपने मूल वेतन का 10% योगदान देता है और केंद्र सरकार 14% देती है।
एनपीएस की कौन कर रहा शिकायत
अधिकारियों का कहना है कि जो लोग 25-30 वर्षों तक नौकरी में बने रहते हैं, उन्हें ओपीएस के तहत मिलने वाले पेंशन के बराबर पर्याप्त लाभ मिल रहा है और कम पेमेंट की शिकायतें केवल उन लोगों से आ रही हैं, जो 20 साल या उससे कम सेवा पूरी करने के बाद इस योजना से बाहर निकल गए हैं।
टाइम्स ऑफ इंडियाा की खबर के मुताबिक वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की घोषणा के बाद वित्त सचिव टी वी सोमनाथन की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई थी। केंद्र ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) पर लौटने से इनकार कर दिया है।
सोमनाथन समिति ने वैश्विक अनुभव के साथ-साथ आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा किए गए चेंजेज के रिजल्ट को भी देखा है। हालांकि, केंद्र के लिए 40 से 45% गारंटी देना संभव है, लेकिन यह उन कर्मचारियों की चिंता को दूर नहीं करता है, जो 25-30 साल से काम कर रहे हैं। नतीजतन, सरकार के अंदर अब 50% गारंटी देने की स्वीकृति बढ़ रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र के पास रिटायरमेंट फंड नहीं है। कई समिति सदस्यों का मानना है कि केंद्र के पास सेवानिवृत्ति निधि नहीं है। यह संभावना है कि केंद्र इस बार भी एक फंड बनाएगा जो पैसे अलग रखेगा। जैसा कि कंपनियां अपने कर्मचारियों के लिए रिटायरमेंट बेनीफिट्स के रूप में अलग फंड रखती हैं।













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