जयपुर : राजस्थान की तीन राज्यसभा सीटों के लिए होने वाला आगामी चुनाव राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्य की विधानसभा में मौजूदा संख्या बल के आधार पर भारतीय जनता पार्टी को दो सीटें और कांग्रेस को एक सीट मिलने की प्रबल संभावना जताई जा रही है।
इन तीन सीटों पर मतदान 18 जून को प्रस्तावित है। चुनाव परिणाम पूरी तरह से राज्य विधानसभा में दलों के संख्याबल और विधायकों की एकजुटता पर निर्भर करेगा।
किन सांसदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है
इन सीटों पर जिन मौजूदा सांसदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनमें कांग्रेस के राज्यसभा सांसद नीरज डांगी, भाजपा के नेता राजेंद्र गहलोत और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह शामिल हैं। इनके कार्यकाल पूरा होने के बाद ही यह तीनों सीटें रिक्त हो रही हैं।
विधानसभा गणित में भाजपा को बढ़त
राजस्थान विधानसभा में वर्तमान स्थिति भाजपा के पक्ष में मानी जा रही है। इसी कारण राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि भाजपा इस चुनाव में दो सीटें आसानी से हासिल कर सकती है। वहीं कांग्रेस के पास संख्या बल सीमित होने के बावजूद एक सीट सुरक्षित मानी जा रही है।
राज्यसभा चुनाव में प्राथमिकता मत प्रणाली (Preference Voting) के तहत जीत तय होती है, जिसमें विधायकों की संख्या और रणनीतिक मतदान निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
कांग्रेस में एक सीट के लिए अंदरूनी प्रतिस्पर्धा
कांग्रेस को मिलने वाली एक संभावित सीट को लेकर पार्टी के भीतर कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। सूत्रों के अनुसार पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सी. पी. जोशी, निवर्तमान सांसद नीरज डांगी और एआईसीसी मीडिया विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा जैसे नाम प्रमुख दावेदारों में शामिल हैं।
पार्टी नेतृत्व की ओर से अंतिम निर्णय अभी तक नहीं लिया गया है, जिससे दावेदारी को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
भाजपा की रणनीतिक बढ़त
भाजपा अपने मौजूदा संख्याबल को बनाए रखते हुए दोनों सीटों पर जीत सुनिश्चित करने की रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी संगठन स्तर पर विधायकों से लगातार संपर्क साधा जा रहा है ताकि क्रॉस वोटिंग की किसी भी संभावना को रोका जा सके।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि भाजपा इस चुनाव को अपनी संगठनात्मक ताकत और विधानसभा में पकड़ के प्रदर्शन के रूप में देख रही है।
चुनावी माहौल में बढ़ी हलचल
राज्यसभा चुनाव को लेकर दोनों प्रमुख दलों में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। विधायकों की एकजुटता, रणनीति और संभावित क्रॉस वोटिंग इस चुनाव के परिणामों पर सीधा असर डाल सकती है। वर्तमान समीकरण भाजपा के पक्ष में माने जा रहे हैं, लेकिन अंतिम नतीजा मतदान के दिन ही स्पष्ट होगा।













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