डेस्क : पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही अहम शांति वार्ता अचानक विफल हो गई। इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हलचल मचा दी है। ईरान ने आरोप लगाया है कि इज़राइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu की एक फोन कॉल ने बातचीत की दिशा ही बदल दी।
करीब 21 घंटे तक चली इस लंबी बातचीत में अमेरिका की ओर से JD Vance शामिल थे, जबकि ईरान की तरफ से वरिष्ठ राजनयिक मौजूद थे। शुरुआत में वार्ता सकारात्मक मानी जा रही थी, लेकिन अंतिम चरण में अचानक गतिरोध पैदा हो गया और कोई ठोस समझौता नहीं हो सका।
ईरान के विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi ने दावा किया कि बातचीत के दौरान नेतन्याहू ने वेंस से फोन पर बात की। उनके मुताबिक, इस कॉल के बाद अमेरिका का रुख बदल गया और वार्ता का फोकस ईरान से हटकर इज़राइल की सुरक्षा चिंताओं पर आ गया।
परमाणु कार्यक्रम बना सबसे बड़ा विवाद
वार्ता में सबसे बड़ा मुद्दा ईरान का परमाणु कार्यक्रम रहा। अमेरिका चाहता था कि ईरान यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह बंद करे और अपने परमाणु भंडार पर अंतरराष्ट्रीय नियंत्रण स्वीकार करे। वहीं ईरान ने इसे अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय अधिकार का मामला बताते हुए सख्त रुख अपनाया।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी मतभेद
इसके अलावा, होर्मुज़ जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता और मध्य पूर्व की सुरक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दों पर भी दोनों देशों के बीच सहमति नहीं बन सकी।
युद्धविराम पर बढ़ा खतरा
यह वार्ता ऐसे समय में हो रही थी जब हाल ही में घोषित युद्धविराम पहले से ही नाजुक स्थिति में था। अब बातचीत के विफल होने के बाद इस युद्धविराम के टूटने की आशंका और बढ़ गई है।
आगे की राह कठिन
विशेषज्ञों का मानना है कि इस असफलता के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है। अमेरिका पहले ही संकेत दे चुका है कि यदि कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो अन्य विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है।
कुल मिलाकर, इस्लामाबाद में हुई यह वार्ता यह दिखाती है कि वैश्विक राजनीति में एक फोन कॉल भी बड़े कूटनीतिक प्रयासों को पटरी से उतार सकता है।













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