ईरान में जारी संघर्ष अब एक महीने से अधिक समय से चल रहा है और इस दौरान क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा पर गहरा असर पड़ा है। अमेरिका और इजरायल के हवाई हमलों के पहले ही दिन ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई की मौत की खबर ने पूरे क्षेत्र में भूचाल ला दिया। यह ईरान के लिए एक असाधारण झटका था। विशेषज्ञों का मानना था कि अमेरिका का मकसद ईरान में नेतृत्व परिवर्तन को मजबूर करना था, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस संकेत नहीं मिले हैं।
ईरान के शीर्ष नेतृत्व में भारी क्षति होने के बावजूद खामेनेई का रुख अडिग है। बिना शर्त सरेंडर का कोई संकेत नहीं मिला है और उनके बेटे मोज़तबा ने कमान संभालते ही आक्रामक रुख अपना लिया है। इसके चलते क्षेत्रीय तनाव लगातार बढ़ रहा है।
अमेरिका की रणनीति और जमीनी हमले की तैयारी
सूत्रों के अनुसार अमेरिका ईरान में संभावित जमीनी कार्रवाई के लिए रणनीति तैयार कर रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप किसी भी समय इस संबंध में घोषणा कर सकते हैं। हालांकि जमीनी हमले के साथ भारी जोखिम जुड़े हैं। ऐसा हमला शहरी युद्ध यानी अर्बन वारफेयर की स्थिति में बदल सकता है, जहां अमेरिकी सेना को ईरान की संकरी गलियों और घनी आबादी वाले शहरों में उतरना होगा।
अर्बन वारफेयर का खतरा:
- शहरी युद्ध में बड़े हथियार जैसे मिसाइल और तोप सीमित प्रभाव रखते हैं।
- इलाके की संकरी गलियों और जटिल भवन संरचनाओं में स्थानीय फोर्सेज के लिए बेहतर गतिशीलता संभव होती है।
- बाहरी सेनाओं को इलाके की अपर्याप्त जानकारी और अप्रत्याशित रुख वाले हमलों के कारण फंसने का खतरा होता है।
रूस का अनुभव यूक्रेन में इसी का उदाहरण है। भारी हथियारों और तकनीकी श्रेष्ठता के बावजूद उसकी सेना शहरों में फंसती दिखी और अर्बन वारफेयर के जटिलताओं का सामना करना पड़ा।
विशेषज्ञों की राय
हाइब्रिड वारफेयर विशेषज्ञ और हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. जयप्रकाश सिंह कहते हैं,
“अर्बन वारफेयर में ईरान को ही फायदा होगा। वह अपने इलाके की पूरी जानकारी रखता है और ड्रोन तथा स्थानीय निगरानी के माध्यम से अमेरिकी सैनिकों को टारगेट कर सकता है। यह युद्ध बिल्डिंग बाय बिल्डिंग फाइटिंग का रूप ले सकता है। कब और कहां हमला होगा, इसका अनुमान लगाना बेहद कठिन है। ऐसे में बाहरी सेना ट्रैप हो सकती है। रूस के साथ यूक्रेन में भी यही हुआ था।”
विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका के लिए यह चुनौती अतीत के अफगानिस्तान, इराक और वियतनाम युद्धों की तरह जटिल साबित हो सकती है।
वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर असर
ईरान खाड़ी क्षेत्र का प्रमुख तेल निर्यातक देश है। संघर्ष और संभावित जमीनी हमले से तेल की वैश्विक आपूर्ति और कीमतों पर असर पड़ सकता है। यूरोप और एशियाई देशों की अर्थव्यवस्था पर भी दबाव बढ़ सकता है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठन ईरान संकट को लेकर सतर्क हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका को अब केवल सैन्य चुनौती नहीं बल्कि राजनीतिक और आर्थिक दांव-पेंच का भी सामना करना होगा। किसी भी जमीनी हमले की स्थिति में अमेरिकी सेना को अर्बन वारफेयर, स्थानीय प्रतिरोध और राजनीतिक दबाव—तीनों का सामना करना पड़ेगा।
निष्कर्ष
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब सीधे टकराव के स्तर पर पहुंच सकता है। शहरी युद्ध की परिस्थितियों में ईरान को रणनीतिक बढ़त मिल सकती है। अमेरिका के लिए चुनौती यह है कि तकनीकी और हवाई श्रेष्ठता के बावजूद गलियों और बिल्डिंग बाय बिल्डिंग संघर्ष में सफल होना आसान नहीं होगा। इस परिदृश्य में वैश्विक तेल बाजार, अंतरराष्ट्रीय राजनीति और क्षेत्रीय सुरक्षा सभी प्रभावित होंगे।
विश्लेषकों के अनुसार, यह युद्ध केवल सैन्य संघर्ष नहीं बल्कि रणनीति, स्थानीय जानकारी और वैश्विक कूटनीति का युद्ध भी होगा।













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