सावन का महीना भगवान शिव के भक्तों के लिए किसी उत्सव की तरह है। पूरे सावन भर शिवभक्त उनकी भक्ति में डूबे रहते हैं। कहते हैं कि सावन का महीना भगवान शिव के लिए कई वजहों से प्रिय है। वैसे तो शिवजी को काफी चीजें पसंद हैं और इनमें से एक है उनका त्रिशूल। क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर भगवान शिव को ये त्रिशूल कहां से मिला था? बता दें कि विष्णुपुराण में इस बारे में लिखा हुआ है। तो चलिए जानते हैं कि आखिर शिवजी के पास त्रिशूल आया कहां से और इसका महत्व क्या है?
त्रिशूल का महत्व और उत्पत्ति
विष्णुपुराण में एक कथा है कि आखिर शिवजी को त्रिशूल किसने दिया? ग्रंथ के अनुसार विश्वकर्मा जी की पुत्री की शादी सूर्यदेव से हुई थी। कुछ साल तो इनकी शादी ठीक चली लेकिन उनकी पुत्री सूर्य की गर्मी अधिक दिनों तक नहीं सह पाईं। उन्होंने अपने पिता से इस पीड़ा के बारे में बात की। तब जाकर विश्वकर्मा ने सूर्यदेव ने अपनी गर्मी को थोड़ा कम करने की प्रार्थना की। सूर्यदेव ने सहमत होकर पृथ्वी पर अपने कुछ अंश गिरा दिए। सूर्यदेव से निकले हुए तेज से विश्वकर्मा ने भगवान शिव का त्रिशूल बनाया। बता दें कि भगवान शिव के त्रिशुल को शक्ति, न्याय और संतुलन का प्रतीक माना जाता है। भगवान शिव के त्रिशूल को लेकर एक किस्सा और प्रचलित है। मान्यता है कि त्रिशूल को खुद भगवान शिव ने ही बनाया है। इसकी उतपत्ति सृष्टि की शुरुआत में प्रकट हुए रज, तम और सत तीन गुणों से बना था।
घर में रख सकते हैं छोटा त्रिशूल
घर में छोटा सा त्रिशूल रखना शुभ माना जाता है। इसे आप घर के मंदिर में रख सकते हैं। अगर इसका साइज बड़ा है तो आप इसे घर छत पर भी लगा सकते हैं। कोशिश यही करनी चाहिए कि इसे हमेशा घर की उत्तर-पूर्व दिशा में ही रखना चाहिए। इसे घर में रखने से शिवजी की कृपा हमेशा बनी रहती है।













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