नई दिल्ली : संसद में सोमवार को लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा हुई। चर्चा की शुरुआत रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पहले ऑपरेशन सिंदूर के लिए सैनिकों की शहादत को नमन किया। रक्षा मंत्री ने पूरे देश की तरफ सेना के प्रति कृतज्ञता प्रकट की। रक्षा मंत्री ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को सामने रखा। रक्षा मंत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर एक ऐतिहासिक सैन्य कार्रवाई की। यह देश की संप्रभुता, अस्मिता और आतंकवाद के खिलाफ हमारे निर्णायक प्रदर्शन था। रक्षा मंत्री ने सदन में बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किन-किन हथियारों का प्रयोग किया गया।
पाकिस्तान के खिलाफ इन हथियारों का इस्तेमाल
7-8 मई को पाकिस्तान पर सफल हमला किया। इसके बाद पाकिस्तान ने स्थिति को एस्केलेट कर दिया। पाकिस्तान ने यूएवी सिस्टम और अन्य साधनों का यूज कर भारतीय वायुसेना के बेस के साथ ही सेना के फॉर्मेशन हेडक्वार्टर को हमला कर दिया। रक्षा मंत्री ने बताया कि हमारी इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस ग्रिड और काउंटर यूएएफ ग्रिड ने इन हमलों को नाकाम कर दिया। रक्षा मंत्री ने कहा कि एस-400, एमआरएसएम, आकाश मिसाइल सिस्टम और एयर डिफेंस सिस्टम बहुत प्रभावी साबित हुए।
पाकिस्तान ने 10 मई तक किए हमले
रक्षा मंत्री ने कहा कि हमारे हमले बेहद तेजी, सटीकता के साथ नपेतुले थे। इसमें 8 मई 2025 को केवल चुनिंदा पाकिस्तानी एयर डिफेंस सिस्टम और सेंसर गाइडेट नेटवर्क को प्रीसीजन गाइडेड मिसाइल से निशाना बनाया गया। उन्होंने कहा कि हमारी कार्रवाई आत्मरक्षा में थी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की तरफ से ये हमले 7 मई से 10 मई तक रात लगभग 1 बजकर 30 मिनट पर बड़े पैमाने पर ड्रोन, रॉकेट और अन्य लंबी दूरी के हथियारों का प्रयोग किया।
रक्षा मंत्री ने कहा, “हमारा ये ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा है और सेनाओं ने अपना लक्ष्य हासिल कर लिया।” उन्होंने कहा कि हमने किसी दबाव में आकर इसे नहीं रोका बल्कि हमने दुश्मन के हर मंसूबे पर पानी फेरा। उन्होंने कहा कि हमारा मकसद युद्ध छेड़ना नहीं था बल्कि आतंकियों के ढांचों को नेस्तनाबूद करना था और मात्र 22 मिनट के ऑपरेशन में उसे हासिल कर लिया गया। रक्षा मंत्री ने कहा कि यह कहना गलत है कि किसी दबाव में ऑपरेशन सिंदूर को रोका गया था। उन्होंने कहा, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सशस्त्र बल अपने सभी उद्देश्यों को पूरा करने में सफल रहे और पाकिस्तान की गुहार लगाने और DGMO स्तर पर बातचीत के बाद ही इसे रोका गया।













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