डेस्क : सत्या एजेंसी ने सेबी के पास अपने आईपीओ के लिए ड्राफ्ट पेपर जमा कर दिए हैं। कंपनी इस आईपीओ के जरिए कुल 600 करोड़ रुपये जुटाना चाहती है। इसमें से 300 करोड़ रुपये नए शेयर जारी किए जाएंगे और बाकी 300 करोड़ रुपये कंपनी के प्रमोटर्स अपने हिस्से के शेयर बेचकर जुटाएंगे, जिसे ऑफर फॉर सेल (OFS) कहा जाता है।
प्रमोटर्स भी बेचेंगे अपने शेयर
कंपनी के प्रमोटर जॉनसन असारिया, जे जॉन सत्या और चार्ल्स पैकियाराज इस आईपीओ में अपनी हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा बेचेंगे। इन तीनों मिलकर करीब 300 करोड़ रुपये के शेयर बेचेंगे। इसका मतलब हर प्रमोटर लगभग 100 करोड़ रुपये के शेयर बेचेगा।
कंपनी का कारोबार
सत्या एजेंसी की स्थापना 2005 में हुई थी। यह कंपनी इलेक्ट्रॉनिक्स और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे टीवी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन आदि की रिटेल बिक्री करती है। कंपनी के स्टोर दक्षिण भारत के आंध्र प्रदेश, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कर्नाटक में मौजूद हैं।
आईपीओ से जुटाए गए पैसों का इस्तेमाल
कंपनी आईपीओ से मिले पैसों का इस्तेमाल अपने कर्ज को चुकाने या कम करने में करेगी। इसके अलावा, कंपनी अपनी सहायक कंपनी यूनीलेट अप्लॉयंस प्राइवेट लिमिटेड में हिस्सेदारी खरीदने के लिए भी पैसे का उपयोग करेगी। बाकी राशि सामान्य कारोबारी जरूरतों में खर्च की जाएगी।
कंपनी का मकसद
कंपनी का मानना है कि शेयर मार्केट में लिस्ट होने से उसकी पहचान और ब्रांड वैल्यू बढ़ेगी। साथ ही, निवेशकों के लिए शेयर खरीदने और बेचने का एक खुला प्लेटफॉर्म मिलेगा। इस आईपीओ को मैनेज करने की जिम्मेदारी आनंद राठी और मोतीलाल ओसवाल इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स को दी गई है।













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