नई दिल्ली : वैश्विक तेल संकट और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति शृंखला पर पड़ रहे दबाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग की अपील की है। उन्होंने विशेष रूप से स्कूलों और कार्यालयों से आग्रह किया है कि आवश्यकता के अनुसार ऑनलाइन कक्षाओं और वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाए, ताकि ईंधन की खपत को कम किया जा सके और आर्थिक दबाव को नियंत्रित रखा जा सके।
प्रधानमंत्री ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में हर नागरिक की भूमिका महत्वपूर्ण है और देशहित में यह आवश्यक है कि ऊर्जा संसाधनों का अनावश्यक उपयोग रोका जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि जहां संभव हो, डिजिटल माध्यमों से शिक्षा और कार्य प्रणाली को जारी रखा जाए।
सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि स्कूल प्रशासन स्थिति का आकलन कर ऑनलाइन कक्षाओं को एक व्यावहारिक विकल्प के रूप में अपनाने पर विचार करें, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित न हो और यात्रा से होने वाली ईंधन खपत भी घटे।
इसके साथ ही, उन्होंने उद्योग जगत और निजी क्षेत्र से भी आग्रह किया है कि वे वर्क फ्रॉम होम मॉडल को प्रोत्साहित करें, ताकि कार्यालयी गतिविधियों में अनावश्यक आवागमन कम हो सके।
सरकारी स्तर पर माना जा रहा है कि यह अपील किसी बाध्यता के रूप में नहीं बल्कि एक जन-जागरूकता और सामूहिक जिम्मेदारी के संदेश के रूप में दी गई है। सरकार का उद्देश्य मौजूदा अंतरराष्ट्रीय तेल संकट के प्रभाव को घरेलू अर्थव्यवस्था पर न्यूनतम रखना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नागरिक और संस्थान इस दिशा में सहयोग करते हैं तो ऊर्जा संरक्षण के साथ-साथ पर्यावरणीय लाभ भी प्राप्त होंगे।
फिलहाल सरकार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और आवश्यकता अनुसार आगे और कदम उठाए जा सकते हैं।













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