डेस्क : मध्य-पूर्व में जारी ईरान युद्ध का असर अब दुनिया के अन्य हिस्सों में भी साफ दिखने लगा है। इसी कड़ी में फिलीपींस ने राष्ट्रीय ऊर्जा आपातकाल घोषित कर दिया है, और ऐसा करने वाला वह दुनिया का पहला देश बन गया है। सरकार ने यह कदम देश में संभावित ईंधन संकट और ऊर्जा आपूर्ति पर बढ़ते खतरे को देखते हुए उठाया है।
फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर ने 24 मार्च को आपातकाल की घोषणा करते हुए कहा कि वैश्विक तेल आपूर्ति में बाधा के कारण देश की ऊर्जा सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। यह आपातकाल फिलहाल एक वर्ष के लिए लागू रहेगा।
घटते ईंधन भंडार ने बढ़ाई चिंता
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, फिलीपींस के पास केवल 40 से 45 दिनों का ईंधन भंडार बचा है। यदि अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई, तो देश में ईंधन की कमी और कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल सकता है।
फिलीपींस अपनी तेल जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। ऐसे में ईरान युद्ध के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आई रुकावट ने उसकी स्थिति को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।
सरकार को मिले विशेष अधिकार
ऊर्जा आपातकाल के तहत सरकार को कई विशेष अधिकार दिए गए हैं, जिनमें शामिल हैं:
- ईंधन की सुचारु आपूर्ति और वितरण सुनिश्चित करना
- जमाखोरी और कालाबाजारी पर कड़ी कार्रवाई
- तेल आयात के लिए त्वरित और अग्रिम भुगतान की व्यवस्था
- वैकल्पिक स्रोतों से ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के प्रयास
सरकार अन्य देशों से तेल आयात के विकल्प भी तलाश रही है, ताकि संकट को कम किया जा सके।
वैश्विक संकट का असर
ईरान युद्ध के चलते वैश्विक तेल बाजार में भारी उथल-पुथल मची हुई है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य—जो दुनिया की बड़ी मात्रा में तेल आपूर्ति का प्रमुख मार्ग है—में व्यवधान के कारण स्थिति और गंभीर हो गई है।
इसका असर सिर्फ फिलीपींस तक सीमित नहीं है, बल्कि एशिया के कई तेल आयातक देशों में महंगाई, ईंधन संकट और आर्थिक दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
बढ़ती कीमतें और जनजीवन पर असर
फिलीपींस में ईंधन की कीमतों में पहले ही तेजी देखी जा रही है। परिवहन क्षेत्र पर इसका सीधा असर पड़ा है, और आम लोगों की दैनिक जिंदगी भी महंगी होती जा रही है। सरकार राहत उपायों और सब्सिडी पर विचार कर रही है।













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