डेस्क : अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विवादित और आपत्तिजनक बयान के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। ट्रंप के तीखे सोशल मीडिया पोस्ट पर ईरान ने सख्त प्रतिक्रिया देते हुए चेतावनी दी है कि अगर हालात बिगड़े तो इसका अंजाम पूरे क्षेत्र के लिए खतरनाक होगा।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप ने ईरान को लेकर कड़ी भाषा का इस्तेमाल किया और साफ कहा कि अगर ईरान ने अपनी हरकतें नहीं रोकीं, तो उसके अहम ढांचे—जैसे बिजली संयंत्र और पुल—निशाने पर आ सकते हैं। इस बयान को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हलचल तेज हो गई है।
ट्रंप के इस बयान पर पलटवार करते हुए ईरान के शीर्ष नेताओं में शामिल मोहम्मद-बाघेर ग़ालिबाफ ने कहा कि अमेरिका की इस तरह की “लापरवाह और उकसाने वाली” भाषा पूरे क्षेत्र को युद्ध की आग में झोंक सकती है। उन्होंने ट्रंप को चेताते हुए कहा कि “ऐसी बातें करने से पहले अंजाम के बारे में सोच लेना चाहिए।”
ईरान के विदेश मंत्रालय ने भी ट्रंप के बयान को बेहद गैर-जिम्मेदाराना करार दिया है। मंत्रालय का कहना है कि किसी देश के बुनियादी ढांचे पर हमले की धमकी देना अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन है और इससे हालात और बिगड़ सकते हैं।
ईरान की ओर से यह भी कहा गया कि अमेरिका को अपनी भाषा और व्यवहार पर नियंत्रण रखना चाहिए, क्योंकि इस तरह के बयान केवल तनाव बढ़ाते हैं, समाधान नहीं देते।
क्यों अहम है मामला?
दोनों देशों के बीच यह तनातनी ऐसे समय पर बढ़ी है, जब पहले से ही मध्य-पूर्व का माहौल संवेदनशील बना हुआ है। खासकर हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर स्थिति नाजुक है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक माना जाता है। यहां किसी भी तरह का टकराव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर डाल सकता है।













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