विनायक चतुर्थी, जिसे वरद विनायक चतुर्थी भी कहा जाता है, हर महीने में शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है। यह विशेष रूप से भगवान गणेश के पूजन के लिए समर्पित होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो श्रद्धालु इस दिन उपवास रखते हैं, उन्हें भगवान गणेश की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
दिसंबर में विनायक चतुर्थी कब है?
पंचांग के अनुसार, दिसंबर महीने में विनायक चतुर्थी की तिथि 4 दिसंबर को दोपहर 1:10 बजे से प्रारंभ होगी और 5 दिसंबर को दोपहर 12:49 बजे तक समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार, 5 दिसंबर को विनायक चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा।
विनायक चतुर्थी पूजा विधि:
- भगवान गणेश जी का जलाभिषेक करें – सबसे पहले गणेश जी की मूर्ति का शुद्ध जल से अभिषेक करें।
- गणेश भगवान को पुष्प, फल चढ़ाएं और पीला चंदन लगाएं – भगवान गणेश को पुष्प, फल अर्पित करें और उन पर पीला चंदन लगाएं।
- मोदक का भोग लगाएं – भगवान गणेश को मोदक का भोग अर्पित करें, क्योंकि यह उनका प्रिय प्रसाद है।
- विनायक चतुर्थी व्रत की कथा का पाठ करें – इस दिन भगवान गणेश की कथा का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
- ॐ गं गणपतये नमः मंत्र का जाप करें – इस मंत्र का जाप श्रद्धा से करें: “ॐ गं गणपतये नमः”।
- पूरी श्रद्धा के साथ गणेश जी की आरती करें – गणेश जी की आरती गाकर उन्हें प्रसन्न करें।
- चंद्रमा के दर्शन करें और अर्घ्य दें – पूजा के बाद चंद्रमा के दर्शन करें और उन्हें अर्घ्य अर्पित करें।
- व्रत का पारण करें – व्रत के समापन पर पारण करके उपवास का उन्मोचन करें।
- क्षमा प्रार्थना करें – पूजा के अंत में भगवान से क्षमा प्रार्थना करें और उनके आशीर्वाद की कामना करें।
विनायक चतुर्थी का मंत्र:
“ॐ गणेशाय नमः”
गणेश जी की आरती:
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे संत करें सेवा॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत निर्धन को माया॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।
कामना को पूर्ण करो जाऊं बलिहारी॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
डिस्क्लेमर:
इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।













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