नई दिल्ली: सरकार एक महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रही है, जिसके तहत वित्त वर्ष 2026-27 तक 12 सरकारी बैंकों की संख्या घटाकर सिर्फ चार बड़े बैंक बनाए जाएंगे। वित्त मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, इन चार में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), पंजाब नेशनल बैंक (PNB), बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) और केनरा–यूनियन बैंक का संयुक्त ढांचा शामिल होगा।
चार बड़े बैंक का गठन
योजना के अनुसार, पहले छोटे और मझोले सरकारी बैंकों को बड़े बैंकों में विलय किया जाएगा और इसके बाद अंतिम चार बड़े मेगा-बैंक का ढांचा तैयार होगा। यह कदम बैंकों की बैलेंस शीट मजबूत करने, संचालन कुशल बनाने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के उद्देश्य से लिया जा रहा है।
केनरा और यूनियन बैंक का विलय
सूत्रों के अनुसार, केनरा बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया का विलय इस प्रक्रिया का अहम हिस्सा होगा। इसके अलावा इंडियन बैंक और यूको बैंक को भी इस ढांचे में शामिल किए जाने पर विचार चल रहा है। यह विलय एक बड़े संयुक्त सार्वजनिक बैंक का रूप लेगा, जो SBI, PNB और BoB के साथ चार मुख्य सरकारी बैंकों में शामिल होगा।
अन्य मिड-साइज बैंकों का विलय
इंडियन ओवरसीज़ बैंक (IOB), सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (CBI), बैंक ऑफ इंडिया (BoI) और बैंक ऑफ महाराष्ट्र (BoM) को SBI, PNB या बैंक ऑफ बड़ौदा में समाहित करने की योजना है। पंजाब एवं सिंध बैंक के लिए अंतिम फैसला अभी लंबित है, लेकिन इसे भी चार बड़े बैंकों में से किसी एक में विलय किया जा सकता है।
मंजूरी और प्रक्रिया
कंसॉलिडेशन प्लान सबसे पहले वित्त मंत्री के पास जाएगा, इसके बाद इसे कैबिनेट सचिवालय, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और SEBI द्वारा समीक्षा और अनुमोदन से गुजरना होगा। अधिकारियों का कहना है कि इस बार का विलय पिछले दौर की तुलना में आसान होगा क्योंकि बड़े बैंक अब मजबूत बैलेंस शीट, बेहतर गवर्नेंस और परिपक्व इंटीग्रेशन सिस्टम के साथ तैयार हैं।
जरूरी क्यों है यह कदम
सरकार का मानना है कि बड़े और मजबूत सरकारी बैंक:
- उच्च स्तर के ऋण देने में सक्षम होंगे,
- बुनियादी ढांचे और औद्योगिक परियोजनाओं को फंड कर पाएंगे,
- तेजी से बढ़ते निजी बैंकों से प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे।
साथ ही, यह कदम शाखा नेटवर्क का एकीकरण, लागत में कमी और पूंजी के बेहतर उपयोग जैसे लाभ भी देगा।
इतिहास
अगर यह योजना लागू होती है, तो यह 2017–2020 के बड़े पुनर्गठन के बाद दूसरा सबसे बड़ा बैंकिंग मर्जर होगा, जिसमें सरकारी बैंकों की संख्या 27 से घटाकर 12 की गई थी।













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