कोलकाता : पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के बाद अब राज्य सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत बड़े स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार, करीब 63 लाख लोगों के राशन कार्ड रद्द किए जाने की तैयारी की जा रही है। यह कदम उन्हीं लोगों से जुड़ा बताया जा रहा है जिनके नाम हाल ही में मतदाता सूची से हटाए गए थे या जिन्हें अयोग्य घोषित किया गया है।
जानकारी के मुताबिक, राज्य के खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने एक राज्यव्यापी सत्यापन अभियान शुरू करने का आदेश जारी किया है। इस अभियान के तहत उन राशन कार्ड धारकों की पहचान की जाएगी जिनका नाम विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान वोटर लिस्ट से हटाया गया है या जिन्हें “मृत, स्थानांतरित, डुप्लीकेट या अपात्र” श्रेणी में रखा गया है।
सरकारी आदेश में कहा गया है कि यह प्रक्रिया 15 जून तक पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। अधिकारियों का कहना है कि इसका उद्देश्य सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाना और अपात्र लाभार्थियों को सूची से हटाना है।
हालांकि इस फैसले को लेकर राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने इसे बड़े पैमाने पर गरीब और वंचित वर्ग को प्रभावित करने वाला कदम बताया है, जबकि प्रशासन का कहना है कि यह केवल पात्र लाभार्थियों की पहचान और व्यवस्था को दुरुस्त करने की प्रक्रिया है।
इस पूरे मामले ने राज्य की राजनीति में एक बार फिर नई बहस छेड़ दी है और आने वाले दिनों में इसके और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।













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