लखनऊ: यूपी के रण में भारतीय जनता पार्टी, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस व समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेताओं का जलवा दिखने जा रहा है। इनके प्रचार का रंग, लोकप्रियता का पैमाना व रणनीतिक कौशल इन सबकी चर्चा है। अब इन कद्दावर नेताओं की सीट वाराणसी, अमेठी व कन्नौज के चुनाव में सबकी दिलचस्पी बढ़ गई है। खास तौर पर दो राष्ट्रीय दलों के नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व राहुल गांधी के सियासी कौशल पर तो देश दुनिया की निगाहें हैं।
देश के सबसे बड़े राज्य में मुख्य विपक्षी दल सपा के नेता के तौर पर अखिलेश यादव की परफार्मेंस पर भी सबकी नजर है। खास तौर पर इंडिया गठबंधन की बड़ी उम्मीदें तो इसी सपा के प्रदर्शन से हैं। इन नेताओं के कंधों पर अपने अपने दलों की नैया पार लगाने का जिम्मा है तो इनके दलों के प्रत्याशी भी इनके नाम व काम का सहारा लेकर खुद संसद पहुंचने की जद्दोजहद में हैं। इसीलिए इन स्टार प्रचारक नेताओं के दौरे, रोड शो, रैलियों की पूरे यूपी में धूम मचने जा रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी:
पूरे देश में सबसे लोकप्रिय नेता नरेंद्र मोदी के तीसरी बार वाराणसी से चुनाव लड़ने से अब यह सीट सबसे ज्यादा चर्चा में है। एनडीए के लिए 400 पार का नारा देने वाले प्रधानमंत्री की उम्मीदें भी सबसे ज्यादा इसी राज्य से हैं। इसलिए अब उनका फोकस यहां बढ़ गया है। पश्चिमी यूपी में रोड शो व रैलियों के बाद अब उनका प्रचार अभियान अब मध्य यूपी की ओर बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री के चुटीले भाषण में निशाने पर कांग्रेस रहती है लेकिन अब सपा भी उनके निशाने पर ज्यादा आ रही है। वे अपनी सरकार के दस साल के काम को सामने रखते हैं साथ ही भ्रष्टाचार व परिवारवाद पर हमला कर विपक्ष की कमजोरियों को उजागर कर रहे हैं। वाराणसी से दो बार लोकसभा का चुनाव जीतने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब यहां हैट्रिक लगाने की तैयारी में हैं। उनके मुकाबले कांग्रेस व सपा के संयुक्त प्रत्याशी के तौर पर अजय राय हैं जो यूपी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हैं।
राहुल गांधी :
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी अपनी भारत जोड़ो न्याय यात्रा के बाद खासे आक्रामक हैं और दस साल की एनडीए सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेर रहे हैं। इलेक्टोरल बांड से लेकर संविधान बदलने की कोशिश, महंगाई व बेरोजगारी तक कई सवालों को उठा कर वह भाजपा को घेरने की कोशिश में हैं। राहुल गांधी केरल की वायनाड सीट से लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं। यहां मतदान हो चुका है। अब इस बात की प्रबल संभावना है कि वह अपनी पुरानी परंपरागत अमेठी सीट से चुनाव लड़ें। पिछले चुनाव में वह अमेठी से भाजपा की स्मृति ईरानी से हार गए थे। इस बार स्मृति ईरानी फिर मैदान में हैं। अमेठी का रण राहुल बनाम स्मृति के हो जाने से इस पर दुनिया भर के राजनीति में दिलचस्पी रखने वालों की नजर रहेगी।
अखिलेश यादव
भाजपा व कांग्रेस के मुकाबले यूं तो सपा का प्रभाव केवल यूपी में हैं। लेकिन 80 सीटों वाले राज्य यूपी में भाजपा के बाद नंबर दो की सबसे सशक्त पार्टी सपा ही है। मुलायम सिंह यादव के न रहने पर अब अखिलेश यादव अपनी पार्टी के शीर्ष नेता हैं। उन पर सारे निर्णय स्वयं लेने, प्रत्याशी तय करने, प्रचार अभियान आगे बढ़ाने, असंतोष को थामने की जिम्मेदारी है। कांग्रेस के साथ चुनावी गठबंधन बना कर चुनाव लड़ रहे अखिलेश की परफार्मेंस से इंडिया गठबंधन को बड़ी उम्मीद हैं। यहां से सपा की सीटों की संख्या के लिहाज से बड़ी कामयाबी गठबंधन को आगे रखने में बड़ी भूमिका निभाएगी। कभी हां कभी न के लंबे सिलसिले के बाद आखिरकार अखिलेश यादव अपनी पुरानी कन्नौज सीट से नामांकन दाखिल कर दिया है। अब हाट सीट में कन्नौज भी शामिल हो गया है।













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