डेस्क : हरियाणा सरकार ने एक बार फिर डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह पर मेहरबानी दिखाई है। बलात्कार जैसे गंभीर अपराध में 20 साल की सजा काट रहा राम रहीम 15वीं बार 40 दिनों की पैरोल पर जेल से बाहर आ रहा है। इससे पहले भी वह बार-बार अलग-अलग कारणों से जेल से बाहर आता रहा है, जिस पर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
गौरतलब है कि गुरमीत राम रहीम को वर्ष 2017 में दो साध्वियों से बलात्कार के मामले में दोषी ठहराया गया था। अदालत ने दोनों मामलों में उसे अलग-अलग 10-10 साल की सजा सुनाई थी। इसके अलावा, उसे पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड (2019) और अपने मैनेजर रंजीत सिंह की हत्या (2002) के मामलों में भी दोषी करार दिया गया था। रंजीत सिंह हत्याकांड में उसे उम्रकैद की सजा मिली थी, हालांकि मई 2024 में “दोषपूर्ण और संदिग्ध जांच” का हवाला देते हुए उसे अन्य चार आरोपियों के साथ बरी कर दिया गया।
राम रहीम इससे पहले भी कई बार जेल से बाहर आ चुका है।
- जनवरी 2023 में उसे 20 दिन की पैरोल मिली थी।
- अप्रैल 2023 में 21 दिन की फरलो दी गई।
- अगस्त 2023 में वह 40 दिनों की पैरोल पर बाहर आया था, इस दौरान उसने डेरा मुख्यालय में सत्संग और प्रवचन भी किए थे।
सबसे अहम बात यह है कि राम रहीम की रिहाइयों का सिलसिला अक्सर चुनावी समय से जुड़ा रहा है, जिस पर विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने बार-बार सवाल खड़े किए हैं।
- अक्टूबर 2020: हरियाणा विधानसभा चुनाव के दौरान 40 दिन की पैरोल
- फरवरी 2022: पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले 21 दिन की फरलो
- जून 2022: हरियाणा निकाय चुनाव के दौरान एक महीने की पैरोल
- अक्टूबर 2022: हरियाणा उपचुनाव के समय 40 दिन की पैरोल
गंभीर अपराधों में दोषी करार दिए जा चुके व्यक्ति को बार-बार राहत दिए जाने से न्याय व्यवस्था, पीड़ितों के अधिकार और राजनीतिक मंशा—तीनों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। राम रहीम की लगातार रिहाई अब सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि राजनीतिक और नैतिक बहस का विषय बन चुकी है।













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