स्पोर्ट्स डेस्क :इंडिया वर्सेस इंग्लैंड टेस्ट सीरीज का दूसरा मुकाबला दो जुलाई से बर्मिंघम के एजबेस्टन मैदान पर खेला जाना है। इंग्लैंड पांच मैचों की सीरीज में 1-0 से आगे है। भारत के स्टार तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह बर्मिंघम टेस्ट में खेलेंगे या नहीं, फिलहाल स्पष्टता नहीं है। उन्हें वर्कलोड मैनेज करने के चलते दूसरे मैच में आराम दिया जा सकता है। बुमराह चोटिल होने से बचने के लिए सीरीज में सिर्फ तीन टेस्ट ही खेलेंगे। वहीं, रवि शास्त्री ने टीम इंडिया को एक क्लियर मैसेज दिया है। भारत के पूर्व हेड कोच शास्त्री का मानना है कि बुमराह को बर्मिंघम में खेलना चाहिए क्योंकि यह बहुत अहम टेस्ट है।
बुमराह ने लीड्स में खेले गए पहले टेस्ट में कुल 43.4 ओवर गेंदबाजी की थी। उन्होंने पहली पारी में पांच विकेट हासिल किए थे लेकिन दूसरी पारी में कोई सफलता नहीं मिली। इंग्लैंड ने लीड्स में 371 रनों का टारगेट आसानी से चेज कर लिया था। भारत का बर्मिंघम में रिकॉर्ड बेहद खराब है। भारत ने एजबेस्ट में 8 टेस्ट खेले हैं और सात में हार का मुंह देखा जबकि एक मैच ड्रॉ रहा। शास्त्री ने आईसीसी रिव्यू में कहा, “भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वो सीरीज में तुरंत ही पलटवार करे।”
उन्होंने कहा, ‘’आप ऐसा टेस्ट मैच हार गए, जिसमें आप ज्यादातर समय हावी रहे। आपने आखिरी दिन बड़ा लक्ष्य होने के बावजूद मैच गंवाया। इंग्लैंड ने गजब तरीके से अपना संयम बनाए रखा। ऐसे में सीरीज में वापसी करने के लिए बहुत अधिक जज्बे की आवश्यकता होगी।” शास्त्री ने आगे कहा, “अब बुमराह खेलेंगे या नहीं, यह कोई नहीं जानता। लेकिन उम्मीद है कि वह खेलेंगे क्योंकि यह बहुत महत्वपूर्ण टेस्ट मैच है। सबकुछ खत्म नहीं हुआ है। बस आपको एक बार में एक मैच पर ध्यान देना है। यह पांच मैचों की सीरीज है और टीम इंडिया वापसी की उम्मीद करेगी।”
लीड्स में हार के बाद भारत के नए टेस्ट कप्तान शुभमन गिल की रणनीति की आलोचना हुई। इंग्लैंड के पूर्व कप्तान नासिर हुसैन ने गिल को प्रतिक्रियावादी कप्तान कहा। हालांकि, शास्त्री ने कहा कि 25 वर्षीय गिल सीखेंगे। उन्होंने बताया कि खराब गेंदबाजी और खराब फील्डिंग ने भी हार में योगदान दिया। शास्त्री ने कहा, “लोग कहते हैं कि वह थोड़ा प्रतिक्रियावादी थे। जब आप अपना पहला टेस्ट मैच (बतौर कप्तान) खेल रहे हों तो ऐसा हो सकता है। खासकर जब बल्लेबाजी के लिए अच्छी परिस्थितियां हों और आउटफील्ड तेज हो तो चीजें इस तरह से हो सकती हैं। लेकिन उन्होंने इससे बहुत कुछ सीखा होगा और अब जब मौका आएगा तो वह थोड़ा और प्रोएक्टिव होंगे, जिसका मतलब है कि गेंदबाजों और फील्डर्स को सपोर्ट देना होगा। उन्हें पता होना चाहिए कि उनकी भूमिका क्या है और उन्हें वहां जाकर उसे अंजाम देना चाहिए।”













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