हेग: अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (आईसीसी) ने बुधवार को इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और पूर्व रक्षा मंत्री योआव गैलेंट के खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट को वापस लेने की मांग खारिज कर दी है। साथ ही, अदालत ने फिलिस्तीनी क्षेत्रों में कथित युद्ध अपराधों की जांच को निलंबित करने की इज़राइली याचिका भी ठुकरा दी है।
आईसीसी ने 21 नवंबर, 2024 को नेतन्याहू, गैलेंट और हमास के एक वरिष्ठ नेता इब्राहीम अल-मसरी (जिन्हें मोहम्मद दीफ़ के नाम से भी जाना जाता है) के खिलाफ ग़ाज़ा युद्ध में कथित युद्ध अपराधों और मानवता के खिलाफ अपराधों को लेकर गिरफ्तारी वारंट जारी किए थे। हालांकि, फरवरी में विश्वसनीय सूत्रों से उनकी मृत्यु की पुष्टि के बाद अदालत ने अल-मसरी के खिलाफ वारंट वापस ले लिया।
इज़राइल ने हेग स्थित इस अदालत की अधिकारिता को मानने से इनकार किया है और ग़ाज़ा में युद्ध अपराधों से इनकार किया है। उसका कहना है कि यह सैन्य अभियान हमास के खिलाफ 7 अक्टूबर 2023 के आतंकी हमले के जवाब में चलाया जा रहा है।
इज़राइल का दावा है कि अप्रैल में आईसीसी की अपील चैंबर के आदेश के बाद अदालत की प्री-ट्रायल चैंबर को इज़राइल की आपत्तियों की समीक्षा करनी थी, जिससे गिरफ्तारी वारंट की वैधता पर सवाल उठता है।
हालांकि, बुधवार को आईसीसी के न्यायाधीशों ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि अधिकारिता को लेकर इज़राइल की आपत्ति पर अब भी सुनवाई लंबित है और जब तक इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं आ जाता, तब तक गिरफ्तारी वारंट प्रभावी रहेंगे।
इस मामले में अदालत द्वारा अधिकारिता पर निर्णय कब आएगा, इसकी कोई निश्चित समयसीमा तय नहीं की गई है।
गौरतलब है कि जून 2025 में अमेरिका ने आईसीसी के चार न्यायाधीशों पर प्रतिबंध लगा दिए थे। यह अभूतपूर्व कदम नेतन्याहू के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी होने के विरोधस्वरूप उठाया गया था। प्रतिबंधित जजों में से दो वही हैं, जिन्होंने इस बार इज़राइल की याचिका खारिज करने का फैसला सुनाया है।













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