आगरा:ताजमहल जैसे प्रेम और करुणा के प्रतीक स्मारक की छांव में इंसानियत को शर्मसार कर देने वाला एक विचलित कर देने वाला मामला सामने आया है। गुरुवार को पश्चिमी गेट की पार्किंग में एक कार के भीतर एक बुजुर्ग को हाथ-पैर बंधी हालत में छोड़ दिया गया। दमघोंटू कार के भीतर बुजुर्ग की हालत बिगड़ती जा रही थी, लेकिन सौभाग्यवश कुछ गाइडों की नज़र कार पर पड़ी और तत्परता से उन्होंने उन्हें बाहर निकालकर उनकी जान बचाई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोपहर के समय कुछ गाइड पार्किंग क्षेत्र से गुजर रहे थे तभी उन्हें एक कार में किसी की कराह सुनाई दी। पास जाकर देखा तो कार के भीतर एक बुजुर्ग हाथ-पैर बंधे हुए असहाय अवस्था में पड़े थे। नज़ारा देखकर लोगों में हड़कंप मच गया। तत्काल पार्किंग कर्मचारियों और अन्य पर्यटकों को सूचना दी गई। गाइडों ने बिना देरी किए कार का लॉक तोड़कर बुजुर्ग को बाहर निकाला।
बुजुर्ग की हालत नाजुक थी, वे कुछ बोल पाने की स्थिति में भी नहीं थे। मौके पर पहुंची पर्यटन पुलिस ने एंबुलेंस बुलाकर उन्हें इलाज के लिए अस्पताल भेजा। डॉक्टरों का कहना है कि यदि कुछ देर और देरी होती तो दम घुटने से उनकी जान भी जा सकती थी।
इसी बीच, जब बुजुर्ग को अस्पताल ले जाया जा रहा था, तभी संबंधित परिवार भी मौके पर पहुंच गया। परिवार का कहना है कि बुजुर्ग पहले से पैरालाइज हैं, इसलिए उन्हें कार में बांधकर छोड़ा गया था ताकि वे खुद को नुकसान न पहुंचाएं। परिवार ने उन्हें अपने साथ वापस ले लिया।
यह घटना पहली बार नहीं है जब पर्यटक अपने साथ आए जीवों या परिजनों को कार में बंद छोड़कर स्मारक दर्शन को निकल जाते हैं। कुछ समय पहले इसी पार्किंग में एक पर्यटक अपने पालतू कुत्ते को कार में बांधकर चला गया था, जिसकी दम घुटने से मौत हो गई थी। लेकिन इस बार बात एक इंसान की जान तक पहुंच गई, जो न केवल असंवेदनशीलता का, बल्कि कानून और नैतिकता की अनदेखी का भी घोर उदाहरण है।
पुलिस ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है। सवाल यह है कि क्या पर्यटन के नाम पर हम संवेदना और उत्तरदायित्व को इस कदर कुचल सकते हैं?













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