डेस्क: चीन और रूस की ओर से रूस-भारत-चीन (RIC) त्रिपक्षीय मंच को पुनर्जीवित करने की कोशिशों के बीच भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस प्रारूप में किसी बैठक पर फिलहाल कोई सहमति नहीं बनी है।
सूत्रों ने बताया, “RIC प्रारूप में किसी बैठक पर इस समय कोई सहमति नहीं हुई है। इसकी तिथि तय करने को लेकर भी कोई चर्चा नहीं चल रही है।”
गुरुवार को विदेश मंत्रालय की साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में भी इस मुद्दे पर मंत्रालय ने कोई ठोस जवाब नहीं दिया। प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने कहा, “यह एक ऐसा मंच है जिसमें तीन देश वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा करते हैं। जब भी यह बैठक होगी, हम आप सभी को एक सुविधाजनक तिथि के बारे में सूचित करेंगे।”
बता दें कि RIC मंच की कल्पना रूस के पूर्व प्रधानमंत्री येवगेनी प्रिमाकोव ने की थी, जिसका उद्देश्य यूरेशियाई शक्ति संतुलन के रूप में पश्चिमी प्रभाव को संतुलित करना था। अब तक इस प्रारूप में 20 से अधिक मंत्री स्तरीय बैठकें हो चुकी हैं। लेकिन वर्ष 2020 में भारत-चीन सीमा विवाद और उससे पहले कोविड महामारी के चलते यह मंच निष्क्रिय हो गया।
पिछले महीने, रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा था, “हम इस त्रिपक्षीय प्रारूप को पुनः आरंभ करने के लिए गंभीर रुचि रखते हैं। यह मंच न केवल विदेश मंत्रियों बल्कि आर्थिक, व्यापार और वित्तीय संस्थाओं के प्रमुखों के स्तर पर भी संवाद का अवसर देता रहा है।”
चीन ने भी रूस की इस पहल का समर्थन करते हुए कहा है कि “यह त्रिपक्षीय सहयोग तीनों देशों के हितों के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण है।”
इस बीच, रूसी उपविदेश मंत्री आंद्रेई रुदेंको ने रूसी समाचार पोर्टल ‘इज़वेस्टिया’ से बातचीत में कहा, “RIC प्रारूप को पुनः आरंभ करने को लेकर हम बीजिंग और नई दिल्ली दोनों से बात कर रहे हैं। हमारे लिए यह मंच इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि तीनों देश BRICS के संस्थापक सदस्य हैं।”
हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि “यह तभी संभव हो पाएगा जब तीनों देशों के आपसी रिश्ते उस स्तर पर पहुंचें जहां त्रिपक्षीय संवाद संभव हो सके।”
विश्लेषकों का मानना है कि भारत की चुप्पी और सतर्कता के पीछे एक बड़ा कारण क्वाड (Quad) समूह भी है, जिसमें अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और भारत शामिल हैं। चीन इस समूह को अपनी बढ़ती ताकत को रोकने की एक रणनीति मानता है। ऐसे में रूस और चीन की कोशिश है कि वे भारत को एक बार फिर से RIC जैसे यूरेशियाई मंच में सक्रिय करें।













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