डेस्क:कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को पिछड़े समाज से माफी मांगते हुए कहा था कि अगर उन्हें इस वर्ग की समस्याएं पहले समझ में आई होतीं तो वह बहुत पहले जातिगत जनगणना करवा देते। उनकी तरफ से पिछड़े वर्गों से मांगी गई इस माफी पर बसपा प्रमुख मायावती ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। मायावती ने कांग्रेस पर स्वार्थ की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि इनके दिल में कुछ, जुबान पर कुछ रहता है। उन्होंने कहा कि यह माफी घड़ियाली आंसू से ज्यादा कुछ नहीं है। कांग्रेस और अन्य जातिवादी पार्टियां हमेशा से ही दलितों, आदिवासियों और पिछड़ों का शोषण करती रही हैं। उन्होंने बसपा को ही दलितों और पिछड़ों का सच्चा हितैषी बताया।
शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफार्म ‘एक्स’ पर मायावती ने लिखा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष द्वारा यह स्वीकार करना कि देश के विशाल आबादी वाले अन्य पिछड़े वर्ग (ओबीसी) समाज के लोगों की राजनीतिक और आर्थिक आशा, आकांक्षा और आरक्षण सहित उन्हें उनका संवैधानिक हक़ दिलाने के मामलों में कांग्रेस पार्टी खरी और विश्वासपात्र नहीं रही है, कोई नई बात नहीं है। बल्कि यह दिल में कुछ और जुबान पर कुछ और जैसी स्वार्थ की राजनीति ज़्यादा लगती है। वास्तव में उनका यह बयान उसी तरह से जगज़ाहिर है जैसा कि देश के करोड़ों शोषित, वंचित और उपेक्षित एससी/एसटी समाज के प्रति कांग्रेस पार्टी का ऐसा ही दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण रवैया लगातार रहा है और जिस कारण ही इन वर्गों के लोगों को फिर अन्ततः अपने आत्म-सम्मान और स्वाभिमान तथा अपने पैरों पर खड़े होने की ललक के कारण अलग से अपनी पार्टी बहुजन समाज पार्टी (बसपा) बनानी पड़ी है।
बसपा प्रमुख ने आगे लिखा कि कुल मिलाकर इसके परिणामस्वरूप कांग्रेस पार्टी यूपी सहित देश के प्रमुख राज्यों की सत्ता से लगातार बाहर है। अब सत्ता गंवाने के बाद इन्हें इन वर्गों की याद आने लगी है। इसे इनकी नीयत और नीति में हमेशा खोट रहने की वजह से घड़ियाली आंसू नहीं तो और क्या कहा जाएगा। जबकि वर्तमान हालात में बीजेपी के एनडीए का भी इन वर्गों के प्रति दोहरे चरित्र वाला यही चाल-ढाल लगता है। वैसे भी एससी/एसटी वर्गों को आरक्षण का सही से लाभ और संविधान निर्माता परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर को भारतरत्न की उपाधि से सम्मानित नहीं करने तथा देश की आज़ादी के बाद लगभग 40 वर्षों तक ओबीसी वर्गों को आरक्षण की सुविधा नहीं देने तथा सरकारी नौकरियों में इनके पदों को नहीं भरकर उनका भारी बैकलॉग रखने आदि के जातिवादी रवैयों को भला कौन भुला सकता है। इनका वह अनुचित जातिवादी रवैया अभी भी जारी है।
मायावती ने लिखा-इतना ही नहीं बल्कि इन सभी जातिवादी पार्टियों ने आपस में मिलकर एससी, एसटी और ओबीसी आरक्षण को किसी ना किसी बहाने से एक प्रकार से निष्क्रिय एवं निष्प्रभावी ही बना दिया है। इस प्रकार दलितों, आदिवासियों और अन्य पिछड़ों के बहुजन समाज को सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक तौर पर गुलाम और लाचार बनाए रखने के मामलों में सभी जातिवादी पार्टियाँ हमेशा से एक ही थैली के चट्टे-बट्टे रहे हैं। जबकि अम्बेडकरवादी पार्टी बसपा सदा ही इन वर्गों की सच्ची हितैषी रही है। यूपी में चार बार बसपा के नेतृत्व रही सरकार में सर्वसमाज के ग़रीबों, मज़लूमों के साथ-साथ बहुजन समाज के सभी लोगों के जान-माल और मज़हब की सुरक्षा और सम्मान तथा इनके हित एवं कल्याण की भी पूरी गारंटी रही है।
उन्होंने लिखा कि देश के बहुजनों का हित केवल बसपा की आयरन गारंटी में ही निहित है। अतः खासकर दलित,आदिवासी व अन्य पिछड़े वर्गों (ओबीसी समाज) के लोग खासकर कांग्रेस, सपा आदि इन विरोधी पार्टियों के किसी भी बहकावे में नहीं आयें। यही उनकी सुख, शान्ति और समृद्धि के लिए बेहतर है।













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