काठमांडू। नेपाल में युवाओं के विरोध प्रदर्शन ने ओली सरकार को उखाड़ फेंका है। सोमवार को नौजवानों ने सत्ता की नींव को हिलाकर रख दिया और संसद भवन, सुप्रीम कोर्ट, राजनीतिक दलों के कार्यालयों, प्रधानमंत्री और मंत्रियों के आवासों तथा काठमांडू के ऐतिहासिक सिंह दरबार को आग के हवाले कर दिया। अब प्रदर्शनकारियों ने देश के सबसे आलीशान हिल्टन होटल को भी आग के हवाले कर दिया है। इन विरोध प्रदर्शनों को देखकर ऐसा लग रहा है कि Gen Z सब कुछ तबाह करने पर तुला हुआ है।
बता दें कि हिल्टन होटल को केवल एक शानदार होटल के रूप में नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है। इसके चमकते अग्रभाग पर बौद्ध प्रार्थना झंडियों से प्रेरित ऊर्ध्वाधर कांच के पैनल लगे थे, जो दिन के उजाले में रंग बदलते थे और सूर्यास्त के बाद जीवंत रंगों में निखर उठते थे।
इस इमारत की वास्तुकला अपने परिवेश के साथ पूर्ण सामंजस्य में थी। एक ओर यह काठमांडू की व्यस्त शहरी सड़कों की ओर झुकी हुई थी, तो दूसरी ओर लांगटांग पर्वत श्रृंखला की ओर खुलती थी, जिससे नेपाल की प्राकृतिक सुंदरता मेहमानों के अनुभव का अभिन्न हिस्सा बनी रहती थी। इसकी वैकल्पिक रूप से बनी बालकनियां और बहती हुई अग्रभाग रेखाएँ बाहरी हिस्से को जीवंत बनाती थीं, जिससे यह इमारत क्षितिज पर एक गतिशील उपस्थिति दर्ज कराती थी।
सेना के नियंत्रण में नेपाल, कर्फ्यू लागू
नेपाल सेना ने हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बीच संभावित अशांति को रोकने के लिए बुधवार को देशव्यापी प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किए और कर्फ्यू घोषित किया। यह कदम तब उठाया गया, जब एक दिन पहले ही सरकार विरोधी हिंसक प्रदर्शनों के कारण प्रधानमंत्री के पी ओली को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। प्रदर्शनों के दौरान देश की प्रमुख इमारतों में आगजनी की गई, जिससे पूरे देश में तनाव फैल गया। सेना ने एक बयान में बताया कि प्रतिबंधात्मक आदेश सुबह से शाम पांच बजे तक प्रभावी रहेंगे, और इसके बाद गुरुवार सुबह छह बजे तक कर्फ्यू लागू रहेगा। सेना ने कहा कि प्रदर्शनों की आड़ में लूटपाट, आगजनी और अन्य विनाशकारी गतिविधियों को रोकने के लिए ये कदम आवश्यक हैं।
मंगलवार रात 10 बजे से देशभर में सुरक्षा अभियान की कमान संभालने वाली सेना ने चेतावनी दी कि प्रतिबंधात्मक अवधि के दौरान किसी भी तरह के प्रदर्शन, तोड़फोड़, आगजनी या व्यक्तियों व संपत्ति पर हमले को आपराधिक कृत्य माना जाएगा और उसका उचित तरीके से सामना किया जाएगा। बयान में कहा गया है कि बलात्कार और हिंसक हमलों का खतरा भी बना हुआ है। देश की सुरक्षा स्थिति को देखते हुए प्रतिबंधात्मक आदेश और कर्फ्यू लागू किया गया है। यह स्पष्ट किया गया कि एम्बुलेंस, दमकल, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और सुरक्षा बलों सहित आवश्यक सेवाओं में लगे वाहनों और कर्मियों को प्रतिबंध और कर्फ्यू के दौरान कार्य करने की छूट होगी।
सेना ने अपने बयान में कुछ समूहों की गतिविधियों पर चिंता जताई है जो कठिन परिस्थितियों का अनुचित लाभ उठा रहे हैं और नागरिकों व सार्वजनिक संपत्ति को गंभीर नुकसान पहुंचा रहे हैं। नेपाल सेना मुख्यालय के एक अधिकारी ने बचाया कि हमने लूटपाट और तोड़फोड़ जैसी किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए अपने सैनिकों को तैनात किया है। उन्होंने बताया कि प्राधिकारियों ने निवासियों को आदेश दिया है कि वे ‘अति आवश्यक’ होने पर ही घर से बाहर निकलें, ताकि आगे की अशांति को रोका जा सके।













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