डेस्क:पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में रविवार को भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई। लगातार हो रही बारिश की वजह से दार्जिलिंग और जलपाईगुड़ी में यह घटनाएं हुईं। जानकारों के मुताबिक ऐसा भीषण भूस्खलन पिछले एक दशक में देखने को नहीं मिला था। भूस्खलन की इन घटनाओं में अभी तक कम से कम 23 लोगों के मारे जाने की आशंका है, जबकि कई दर्जन लोग घायल हो गए हैं। इसके अलावा कई गांव पूरी तरह से सड़क मार्ग से कट गए हैं, जिससे दार्जिलिंग जैसी जगह पर मौजूद पर्यटक भी पहाड़ों में ही फंस गए हैं।
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक भूस्खलन की यह घटनाएं सबसे ज्यादा मिरिक, दार्जिलिंग और जलपाईगुडी में हुई। इनमें अब तक कुल 23 लोगों के मारे जाने की आशंका है। एनडीआरएफ और स्थानीय जिला प्रशासन के अनुसार, केवल दार्जिलिंग जिले में ही कुल 18 लोगों ने अपनी जान गंवाई है।
इससे पहले दिन में उत्तर बंगाल विकास मंत्री उदयन गुहा ने भूस्खलन की वजह से स्थिति को चिंताजनक बताया था। दार्जिलिंग क्षेत्र की देखरेख करने वाले गोरखालैंड क्षेत्रीय प्रशासन (जीटीए) ने कहा कि पूरे क्षेत्र में 35 स्थानों पर भूस्खलन की सूचना मिली है।अधिकारियों का कहना है कि यह 2015 के बाद से सबसे भीषण भूस्खलन आपदा हो सकती है। उस समय पर आई आपदा में 40 लोगों ने अपनी जान गंवा दी थी।
प्रकृति के इस गुस्से में दार्जिलिंग पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। मिरिक सुखियापोखरी मार्ग जैसी प्रमुख सड़कें बंद हो गई है और क्षेत्र के मुख्य राजमार्गों पर कीचड़ की मोटी परत जमा हो गई है। एनडीआरएफ के मुताबिक दार्जिलिंग और उत्तरी सिक्किम में सड़क संपर्क बुरी तरह बाधित हो गया है, सिलीगुड़ी को मिरिक-दार्जिलिंग मार्ग से जोड़ने वाला एक लोहे का पुल क्षतिग्रस्त हो गया है, जिससे प्रमुख पहुँच मार्ग कट गए हैं।
इसके अलावा कोलकाता, हावडा और हुगली से दुर्गा पूजा की छुट्टियां मानने के लिए दार्जिलिंग पहुंचे सैंकड़ों पर्यटक भारी बारिश की वजह से अब अपनी-अपनी जगह पर फंसे हुए हैं। राज्य में बढ़ते संकट को देखते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रविवार को आपातकालीन बैठक बुलाई। इस बैठक के बाद उन्होंने घोषणा की कि वह नुकसान का आकलन करने के लिए सोमवार 6 अक्तूबर को उत्तर बंगाल का दौरा करेंगीं। एक मीडिया प्लेटफार्म से बात करते हुए ममता ने कहा, “समस्या गंभीर है। भूटान में लगातार बारिश के कारण पानी उत्तर बंगाल में भर गया है। यह आपदा दुर्भाग्यपूर्ण है – प्राकृतिक आपदाएँ हमारे नियंत्रण से बाहर हैं।” उन्होंने कहा कि केवल 12 घंटों में 300 मिमी से अधिक बारिश दर्ज की गई, जिससे कम से कम सात जगहों पर भूस्खलन और बाढ़ आ गई। इस पूरे घटनाक्रम पर प्रधानमंत्री मोदी ने भी दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार इस पर कड़ी नजर रखे हुए है।
आपको बता दें दार्जिलिंग के लोगों की मुसीबत अभी थमी नहीं है। मौसम विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि 6 अक्तूबर को भी दार्जिलिंग और उसके आसपास के इलाकों में भारी बारिश होने की संभावना है। आईएमडी ने कूचबिहार और जलपाईगुड़ी के लिए रेड अलर्ट और दार्जिलिंग जिले के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी है। दूसरी तरफ, हिमालय पर हुई बारिश का असर नेपाल में भी देखा गया, जो पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग की सीमा से लगा है। नेपाल में भारी बारिश हुई है, जिसके कारण भूस्खलन और अचानक बाढ़ आई है, जिसके परिणामस्वरूप रविवार तक 24 घंटों में 52 लोगों की मौत हो गई।













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