डेस्क: अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच जारी सीमा विवाद के बीच भारत ने अफगानिस्तान का खुलकर समर्थन किया है। भारत ने कहा कि इस्लामाबाद का इतिहास आतंकवाद से जुड़ा हुआ है, फिर भी वह अपनी विफलताओं के लिए पड़ोसियों को दोष देता रहता है। पिछले सप्ताह पाकिस्तान ने काबुल समेत अफगानिस्तान के कई शहरों में एयरस्ट्राइक की, तब तालिबानी विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी भारत की यात्रा पर आए थे। मुत्ताकी ने भारत को आश्वासन दिया कि अफगान धरती का इस्तेमाल कभी भी भारत के खिलाफ नहीं होने दिया जाएगा।
विदेश मंत्रालय का बयान
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जैसवाल ने कहा कि भारत अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव पर बारीकी से नजर रख रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान तनाव की स्थिति केवल इस्लामाबाद की वजह से बनी है। जैसवाल ने कहा कि भारत पूरी तरह से अफगानिस्तान की स्वतंत्रता, एकता और अखंडता के लिए प्रतिबद्ध है।
पाकिस्तान की तीन आदतें
जैसवाल ने पाकिस्तान के व्यवहार में तीन स्पष्ट पैटर्न बताए:
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पाकिस्तान आतंकियों को पनाह देता है और आतंकवादी गतिविधियों में मदद करता है।
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पाकिस्तान अपनी असफलताओं के लिए हमेशा पड़ोसियों को दोष देता रहा है।
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पाकिस्तान को यह रास नहीं कि अफगानिस्तान अपनी अखंडता को मजबूत कर रहा है और विकास की राह पर है।
हालिया सीमा हिंसा
जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में एक तालिबान कमांडर को मारने के लिए एयरस्ट्राइक की। हालांकि बाद में कमांडर का ऑडियो संदेश सामने आया जिसमें उसने जीवित होने का दावा किया। इस एयरस्ट्राइक के बाद अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर झड़पें शुरू हो गईं। तालिबान ने दावा किया कि इस झड़प में 58 से अधिक पाकिस्तानी सैनिक मारे गए।
अफगानिस्तान के स्पिन बोल्डक क्षेत्र के प्रशासन ने कहा कि इस झड़प में कम से कम 40 अफगान नागरिक मारे गए। 2021 में तालिबानी शासन के कब्जे के बाद डूरंड लाइन पर ऐसी हिंसा नहीं हुई थी। पाकिस्तान की मांग है कि अफगानिस्तान तहरीक-ए-तालिबान जैसे संगठनों से निपटे और उन्हें पनाह न दे। वहीं तालिबान का आरोप है कि पाकिस्तानी सेना दुष्प्रचार कर रही है और इस्लामिक स्टेट से जुड़े संगठनों को पनाह देती है।
भारत की रणनीतिक उपस्थिति
जैसवाल ने कहा कि भारत जल्द ही अफगानिस्तान में अपनी रणनीतिक उपस्थिति बनाएगा। विदेश मंत्री एस. जयशंकर पहले ही कह चुके हैं कि काबुल में भारत का दूतावास जल्द ही फिर से खुलेगा। काबुल के टेक्निकल मिशन को पूर्ण दूतावास में तब्दील कर दिया जाएगा।













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