डेस्क: भारत समेत पड़ोसी देशों में हर रोज औसतन पांच से अधिक भूकंप दर्ज किए जा रहे हैं, बावजूद इसके बड़े भूकंप का खतरा अभी टला नहीं है। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के 169 सिस्मिक स्टेशनों की रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष जनवरी से सितंबर तक कुल 1467 भूकंप दर्ज किए गए, जिनमें से 382 का केंद्र भारत ही रहा।
पिछले नौ महीनों में भूगर्भीय हलचल के मामले में देश के उत्तर-पूर्वी और उत्तरी क्षेत्र सबसे सक्रिय रहे। उत्तर-पूर्व क्षेत्र में 180 बार और उत्तरी क्षेत्र में 92 बार भूकंप दर्ज किया गया। पूर्वोत्तर राज्यों जैसे असम, अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर में विशेष संवेदनशीलता देखी गई। देश के अन्य हिस्सों में 110 भूकंप रिकॉर्ड किए गए। इसके अलावा, नेपाल, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, तिब्बत और भूटान में भी सालभर हलचल रही। भू-वैज्ञानिकों का मानना है कि ये झटके सामान्य भूगर्भीय गतिविधियों का हिस्सा हैं, लेकिन बड़े भूकंप की आशंका बनी हुई है।
इस साल भूकंप की संख्या:
- जनवरी: 340
- फरवरी: 119
- मार्च: 174
- अप्रैल: 172
- मई: 157
- जून: 111
- जुलाई: 135
- अगस्त: 112
- सितंबर: 147
कुल: 1467
हिमालय क्षेत्र में चट्टानों की हलचल
वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के निदेशक डॉ. विनीत गहलोत के अनुसार, एशिया में भूकंप मुख्य रूप से हिमालय क्षेत्र में होते हैं। यहां की चट्टानें आपस में टकराती और खिसकती हैं, जो हिमालयन फ्रंटल थ्रस्ट (HFT), मेन बाउंड्री थ्रस्ट (MBT) और मेन सेंट्रल थ्रस्ट (MCT) जैसे क्षेत्रों में सक्रिय होती हैं। इसके अलावा, भारतीय प्लेट के म्यांमार प्लेट के नीचे खिसकने से भी भूकंप आते हैं, जो इंडो-बर्माज वेज क्षेत्र में दर्ज होते हैं।
उत्तर भारत अधिक संवेदनशील
उत्तर भारत में जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड सबसे संवेदनशील हैं। नॉर्थ-ईस्ट के सभी राज्य संवेदनशील माने जाते हैं। उत्तर-पश्चिम में दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान के बीकानेर, बाड़मेर, झुंझुनू, चूरू और मध्य प्रदेश के अलीराजपुर, सिंगरौली, बैतूल, खंडवा भी खतरे में हैं। महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल के कुछ जिले भी भूकंप के प्रति संवेदनशील हैं।
भूकंप की तीव्रता
नौ महीनों में आए भूकंपों में अधिकांश की तीव्रता 3.0 से 3.9 रही, जो कुल भूकंपों का 35-45% हिस्सा हैं। इसके बाद 4.0 से 4.9 तीव्रता वाले भूकंप 29-43% रहे।
विशेषज्ञ चेतावनी: लगातार आने वाली हलचल बड़े भूकंप का संकेत हो सकती है। प्रशासन और जनता को सतर्क रहने की जरूरत है।













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