डेस्क: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में दो महत्वपूर्ण बिल पेश किए हैं, जिनका असर तंबाकू, पान मसाला और अन्य ‘सिन गुड्स’ पर पड़ेगा। यह बिल हैं – सेंट्रल एक्साइज (अमेंडमेंट) बिल 2025 और हेल्थ सिक्योरिटी से नेशनल सिक्योरिटी सेस बिल 2025। सरकार ने कहा कि मौजूदा GST कम्पेनसेशन सेस के खत्म होने के बाद इन वस्तुओं पर नए टैक्स ढांचे की जरूरत है।
नए एक्साइज अमेंडमेंट बिल की मुख्य बातें:
- तंबाकू उत्पादों जैसे सिगरेट, सिगार, हुक्का, जर्दा और चबाने वाले तंबाकू पर नई एक्साइज ड्यूटी का प्रस्ताव।
- सिगरेट पर प्रति 1,000 स्टिक ₹5,000 से ₹11,000 तक एक्साइज ड्यूटी लग सकती है।
- कच्चे तंबाकू पर 60–70% और निकोटीन आधारित इनहेलेशन प्रोडक्ट्स पर 100% तक टैक्स प्रस्तावित।
- वर्तमान में सिगरेट पर 5% एड-वेलोरम टैक्स और 2,000–3,600 रुपये प्रति 1,000 स्टिक सेस लगता है। नए ढांचे में, मौजूदा सेस खत्म होने के बाद तंबाकू उत्पादों पर 40% GST + एक्साइज ड्यूटी लागू होगी।
- सरकार का कहना है कि इससे टैक्स का बोझ पहले जैसा ही रहेगा और राजस्व में कमी नहीं आएगी।
हेल्थ सिक्योरिटी से नेशनल सिक्योरिटी सेस बिल:
- पान मसाला जैसे उत्पादों पर नया सेस लगाने का प्रस्ताव।
- सेस का एक हिस्सा सार्वजनिक स्वास्थ्य पर खर्च होगा और दूसरा हिस्सा राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी आवश्यकताओं पर।
- जरूरत पड़ने पर अन्य उत्पादों पर भी यह सेस लागू किया जा सकता है।
- विपक्षी सांसद सौगत रॉय ने विरोध करते हुए कहा कि बिल में तंबाकू के हानिकारक प्रभाव का जिक्र नहीं है और सेस की राशि राज्यों के साथ साझा न होने के कारण वे इसके पक्ष में नहीं हैं।
पृष्ठभूमि:
GST लागू होने के समय 2017 में राज्यों को राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए कम्पेनसेशन सेस पांच साल के लिए तय किया गया था, जिसे बाद में 2026 तक बढ़ाया गया। कोविड के दौरान लिया गया कर्ज चुकाने के लिए यह सेस जारी रहा। अब जब यह कर्ज दिसंबर तक पूरा हो जाएगा, तो तंबाकू और पान मसाला पर वर्तमान सेस बंद हो जाएगा। नए बिलों के माध्यम से सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि सिन गुड्स पर टैक्स पहले जैसी दरों पर जारी रहे और सरकार व राज्यों के राजस्व में कमी न आए।













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