डेस्क : पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने मंगलवार को पार्टी नेतृत्व पर तीखा हमला बोला और कहा कि अगर कांग्रेस के कर्ताधर्ता असहमति के स्वर को सहन नहीं कर सकते, तो यह मुख्य विपक्षी दल के लिए विनाशकारी साबित होगा। उन्होंने पार्टी को चेतावनी दी कि ऐसे हालात में कांग्रेस को शासन करने का कोई अधिकार नहीं है।
अय्यर ने कांग्रेस आलाकमान को चुनौती दी कि राजीव गांधी के 5 मई 1989 के उस बयान को राहुल गांधी के मुंह से दोहराया जाए जिसमें कहा गया था, “सिर्फ धर्मनिरपेक्ष भारत ही बरकरार रह सकता है। यदि भारत धर्मनिरपेक्ष नहीं है तो उसे कायम रहने का हकदार नहीं है।”
पूर्व मंत्री ने पार्टी में असहमति के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के समय कांग्रेस में असहमति को सम्मान दिया जाता था। उन्होंने इंदिरा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि जब उन्होंने असहमति के कारण अलग होकर आपातकाल लगाया, तब कांग्रेस चुनावों में हार गई। अय्यर ने जोर देकर कहा कि कांग्रेस की असली ताकत विभिन्न विचारों में निहित है और इसे हमेशा स्वीकार किया गया।
अय्यर ने राजीव गांधी के समय असहमति जताने वाले नेताओं आरिफ मोहम्मद खान, वी.पी. सिंह और अरुण नेहरू का उदाहरण देते हुए कहा कि जो ईमानदारी से असहमति रखते थे, उन्हें पार्टी में जगह दी गई, जबकि जो बेईमानी से असहमति करते थे, उनका परिणाम इतिहास ने स्वयं तय किया।
उन्होंने कांग्रेस के मौजूदा नेतृत्व पर भी कटाक्ष किया कि वर्तमान तंत्र असहमति का सामना करने में असमर्थ है। अय्यर ने कहा, “असहमति लोकतंत्र की बुनियाद है। यदि इसे विनम्रता और स्पष्टता के साथ स्वीकार नहीं किया जा सकता, तो हमें शासन करने का कोई अधिकार नहीं है।”
इतिहास का हवाला देते हुए अय्यर ने बताया कि सुभाष चंद्र बोस को कांग्रेस से बाहर नहीं निकाला गया था, बल्कि उन्होंने अहिंसा पर महात्मा गांधी से मतभेद के बाद कांग्रेस छोड़कर फॉरवर्ड ब्लॉक बनाया। इसके अलावा, उन्होंने जवाहरलाल नेहरू और उनके पिता मोतीलाल नेहरू के बीच गहरे मतभेदों का ज़िक्र किया और कहा कि पार्टी में नाराज़ लोगों से हमेशा इस तरह निपटा गया।
अय्यर ने वीडियो संदेश में दावा किया कि कांग्रेस आलाकमान ने उन्हें कार्य समिति से बाहर कर रखा है और अपने भाषण का अंत करते हुए उन्होंने नारा लगाया, “राजीव गांधी अमर रहें।”













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