डेस्क : नीतीश कुमार के राज्यसभा चुनाव जीतने के बाद बिहार की राजनीति में नए मुख्यमंत्री को लेकर अटकलों का दौर तेज हो गया है। एनडीए खेमे में अभी तक इस पर अंतिम फैसला नहीं हो पाया है कि राज्य की कमान किसके हाथों में सौंपी जाएगी। इसी बीच यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि भाजपा पहली बार बिहार में अपना मुख्यमंत्री बना सकती है।
इस सियासी हलचल के बीच जन सुराज पार्टी के सूत्रधार और पूर्व चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने बड़ा दावा करते हुए ‘गुजरात कनेक्शन’ का मुद्दा उठा दिया है। मुंगेर में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के बाद मुख्यमंत्री कौन बनेगा, इस पर फिलहाल कोई स्पष्टता नहीं है और जो भी अटकलें लगाई जा रही हैं, वे निराधार हैं।
प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री राज्य के बजाय गुजरात के हितों को प्राथमिकता देगा। उन्होंने कहा कि यह फैसला केंद्र में बैठी नरेंद्र मोदी सरकार की पसंद के अनुसार होगा।
उन्होंने कहा, “बिहार में पहली बार ऐसे लोग मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठेंगे, जिनकी प्राथमिकता बिहार नहीं, बल्कि गुजरात होगी। राज्य की नीतियां भी उसी हिसाब से तय की जाएंगी।”
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले पर कटाक्ष करते हुए किशोर ने कहा कि जिस नेता के पास 200 से अधिक विधायकों का समर्थन हो, वह स्वेच्छा से पद नहीं छोड़ता। उन्होंने नीतीश कुमार की शारीरिक और मानसिक स्थिति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि वे अब लंबे समय तक मुख्यमंत्री पद पर बने रहने की स्थिति में नहीं हैं।
प्रशांत किशोर ने यह भी दोहराया कि उनकी पार्टी पहले ही यह भविष्यवाणी कर चुकी थी कि चुनाव परिणाम चाहे जो भी हो, नीतीश कुमार मुख्यमंत्री नहीं रहेंगे। उन्होंने दावा किया कि चुनाव के कुछ ही महीनों बाद यह बात सच साबित होती दिख रही है।
एनडीए की जीत पर सवाल उठाते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि इसमें चुनाव आयोग और केंद्र सरकार की भूमिका रही है। उनका कहना था कि यदि कथित योजनाओं और व्यवस्थाओं का सहारा न लिया जाता, तो एनडीए को सफलता नहीं मिलती।
रोजगार और पलायन के मुद्दे पर भी किशोर ने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद बिहार से गुजरात जाने वाले मजदूरों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है और अब यह आंकड़ा लाखों में पहुंच चुका है। उनका आरोप है कि यदि बिहार में उद्योग नहीं लगाए गए, तो आने वाले वर्षों में यह पलायन और बढ़ेगा।
उन्होंने कहा, “अगर केंद्र की पसंद का मुख्यमंत्री बिहार में बैठाया गया, तो यहां के युवाओं का पलायन और तेज होगा। गुजरात में फैक्ट्रियों के मालिक वहीं के लोग रहेंगे और बिहार के युवा मजदूर बनकर काम करने को मजबूर होंगे।”













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