नई दिल्ली। आई-पैक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ सख्त टिप्पणी की है। उन्होंने कहा है कि यह अपने आप में एक ऐसे व्यक्ति का काम है, जो मुख्यमंत्री भी हैं और जिन्होंने लोकतंत्र को खतरे में डालने के लिए पूरे सिस्टम का इस्तेमाल किया है। उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव भी चल रहे हैं और दो फेज में वोटिंग होनी है।
इस साल की शुरुआत में जनवरी महीने में ईडी ने आई-पैक के कई ठिकानों पर छापे मारे थे। इस दौरान, खुद ममता बनर्जी आईपैक के को-फाउंडर प्रतीक जैन के घर में रेड के समय घुस गई थीं और कुछ फाइलें लेकर आ गई थीं। तब यह बड़ा राजनैतिक मुद्दा बना था। केंद्रीय एजेंसी ने आरोप लगाया है कि बनर्जी ने उस जगह से अहम सबूत हटा दिए। कोर्ट ने ममता बनर्जी के खिलाफ तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि उनके कामों ने लोकतंत्र को खतरे में डाल दिया। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी भी राज्य का मुख्यमंत्री, किसी जांच के बीच में, किसी जगह पर इस तरह से नहीं घुस सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संविधान बनाने वाले इस काम को मंजूरी नहीं देते। उन्होंने कहा, “आपने हमें सीरवाई और अंबेडकर के लेखों के बारे में बताया, लेकिन उनमें से किसी ने भी इस देश में ऐसी स्थिति की कल्पना नहीं की होगी कि एक दिन कोई मौजूदा मुख्यमंत्री, जब कोई जांच चल रही हो, तो दफ्तर में चला जाएगा।”
लाइव लॉ के अनुसार, राज्य ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत ईडी द्वारा दायर रिट याचिका की स्वीकार्यता पर सवाल उठाया है। राज्य के अधिकारियों की ओर से वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने यह तर्क दिया कि यह मामला मूल रूप से राज्य और केंद्र के बीच का विवाद है, और इसलिए अनुच्छेद 32 के तहत रिट याचिका दायर करने के बजाय, भारत के संविधान के अनुच्छेद 131 के तहत एक मुकदमा दायर किया जाना चाहिए।
‘राज्य और केंद्र के बीच का विवाद नहीं‘













मुख्य समाचार
देश
राज्य-शहर
विदेश
बिजनेस
मनोरंजन
जीवंत
