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हिंदुओं की एकता जरूरी, मंदिरों के नाम पर विभाजन नहीं: सुप्रीम कोर्ट

ON THE DOT TEAM by ON THE DOT TEAM
April 23, 2026
in देश
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दबाव से मुक्त होकर फैसले लें जज: न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना

File Photo

डेस्क : सुप्रीम कोर्ट में धार्मिक अधिकारों और मंदिर प्रवेश से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई के दौरान जस्टिस बी. वी. नागरत्ना ने हिंदू समाज की एकता पर जोर देते हुए कहा कि मंदिरों और संप्रदायों के आधार पर समाज में विभाजन उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि हिंदुओं को एकजुट रहना चाहिए और आपसी भेदभाव से बचना चाहिए।

सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने टिप्पणी की कि यदि किसी मंदिर में केवल एक विशेष संप्रदाय के लोगों को प्रवेश दिया जाए और अन्य श्रद्धालुओं को रोका जाए, तो इससे समाज कमजोर होता है। उन्होंने कहा कि “वे हमारे मंदिर नहीं आ सकते, हम उनके मंदिर नहीं जा सकते” जैसी मानसिकता समाज को तोड़ने का काम करती है।

यह टिप्पणी संविधान पीठ के समक्ष लंबित उन याचिकाओं की सुनवाई के दौरान आई, जिनमें सबरीमाला मंदिर सहित विभिन्न धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के प्रवेश, धार्मिक परंपराओं और मौलिक अधिकारों से जुड़े मुद्दे शामिल हैं।

अदालत ने सुनवाई के दौरान यह भी स्पष्ट किया कि संविधान धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है, लेकिन यह अधिकार सार्वजनिक व्यवस्था, स्वास्थ्य और नैतिकता की सीमाओं के अधीन है। न्यायालय ने माना कि प्रत्येक धर्म और संप्रदाय की अपनी विशिष्ट परंपराएं होती हैं, इसलिए हर मामले को उसके तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर देखा जाना चाहिए।

सुनवाई में वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल सुब्रमण्यम ने भी पक्ष रखते हुए कहा कि राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारियां महत्वपूर्ण हैं, लेकिन धर्म, आस्था और विवेक की स्वतंत्रता भी समान रूप से संरक्षित रहनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब धार्मिक स्थलों में प्रवेश और परंपराओं को लेकर देशभर में समय-समय पर बहस होती रही है। अदालत की टिप्पणी को सामाजिक समरसता और संवैधानिक संतुलन के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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