डेस्क : ईरान ने बुधवार को अमेरिका पर दोनों देशों के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने कहा कि तेहरान और वाशिंगटन के बीच हुआ समझौता कभी भी आपसी विश्वास पर आधारित नहीं था, बल्कि “प्रतिबद्धता के बदले प्रतिबद्धता” के सिद्धांत पर आधारित था। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका ने एकतरफा कार्रवाई और सैन्य हमलों के जरिए इस समझौते की भावना को कमजोर किया है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बकाई ने कुरान की एक आयत का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि किसी पक्ष से विश्वासघात की आशंका हो तो उसके साथ समझौते को समान शर्तों पर समाप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अल्लाह विश्वासघात करने वालों को पसंद नहीं करता।
बकाई ने दावा किया कि समझौते की पांचवीं धारा में जलडमरूमध्य हॉर्मुज़ से जहाजों के सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था तय करने की जिम्मेदारी ईरान को दी गई थी, लेकिन अमेरिका ने इस प्रावधान को चुनौती देकर न केवल समझौते का उल्लंघन किया बल्कि ईरान के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई भी की।
उन्होंने कहा कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान अपने राष्ट्रीय हितों और संप्रभुता की रक्षा के लिए हरसंभव कदम उठाता रहेगा।
इस बीच, ईरान के कानूनी एवं अंतरराष्ट्रीय मामलों के उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि ट्रंप की टिप्पणियां यह दर्शाती हैं कि वर्षों से दबाव, प्रतिबंध और धमकियों पर आधारित अमेरिकी नीति पूरी तरह विफल रही है।
ग़रीबाबादी ने कहा कि ट्रंप द्वारा ईरानी जनता का अपमान करना और आगे हमले की धमकी देना ताकत का नहीं बल्कि उनकी असफल नीति का प्रमाण है। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रंप केवल “ताकत की भाषा” समझते हैं।
ईरान की यह प्रतिक्रिया उस समय आई जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2026 नाटो शिखर सम्मेलन के बाद तुर्किये में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उन्हें नहीं लगता कि ईरान के साथ संघर्ष दोबारा शुरू होगा, हालांकि उनके अनुसार युद्धविराम समझौता अब उनके लिए “समाप्त” हो चुका है।
ट्रंप ने कहा कि यदि भविष्य में ईरान की ओर से कोई हमला होता है तो अमेरिका उसका कई गुना अधिक ताकत से जवाब देगा। उन्होंने कहा, “उन्होंने कुछ जहाजों पर हमला किया, इसलिए हमने उनसे दस गुना ज्यादा ताकत से जवाब दिया।”
अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी दावा किया कि वह ईरान की कथित “किल लिस्ट” में सबसे ऊपर हैं। साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि अब वह तेहरान के साथ किसी नए कूटनीतिक समझौते के पक्ष में पहले जितने इच्छुक नहीं हैं।
ट्रंप ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि मैं अब कोई समझौता करना चाहता हूं। बेहतर होगा कि इस मामले को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाए।” उन्होंने ईरानी नेतृत्व को “पागल” करार देते हुए कहा कि यदि भविष्य में कोई सैन्य कार्रवाई होती है तो वह सीमित अवधि की होगी और क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से की जाएगी।













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