डेस्क : अमेरिका में एच-1बी और पर्म (स्थायी श्रम प्रमाणन) वर्क वीजा से जुड़े कथित फर्जीवाड़े के खिलाफ व्यापक जांच अभियान शुरू किया गया है। अमेरिकी श्रम विभाग के महानिरीक्षक कार्यालय (ऑफिस ऑफ द इंस्पेक्टर जनरल-ओआईजी) के अनुसार, जांच के दायरे में कई बड़ी कंपनियां हैं, जिनमें भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी कॉग्निजेंट का नाम भी शामिल है। हालांकि, अभी तक किसी भी कंपनी के खिलाफ आरोप सिद्ध नहीं हुए हैं और जांच जारी है।
यह कार्रवाई अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में गठित ‘धोखाधड़ी उन्मूलन कार्यबल’ (टास्क फोर्स टू एलिमिनेट फ्रॉड) के तहत की जा रही है। श्रम विभाग का कहना है कि वीजा प्रणाली के दुरुपयोग और विदेशी श्रमिकों के कथित शोषण से जुड़े मामलों की गहन जांच की जा रही है।
ओआईजी की प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि कुछ नियोक्ताओं और श्रम दलालों ने कथित रूप से फर्जी श्रम प्रमाणन और वीजा आवेदन प्रस्तुत किए। आरोप है कि विदेशी कर्मचारियों से कम वेतन पर काम कराया गया, उनके वेतन से अवैध कटौतियां की गईं तथा श्रम कानूनों का उल्लंघन किया गया। एजेंसी का कहना है कि यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो इससे अमेरिकी श्रमिकों के रोजगार के अवसर प्रभावित हो सकते हैं।
फॉक्स बिजनेस को दिए एक साक्षात्कार में श्रम विभाग के महानिरीक्षक एंथोनी डी’एस्पोसिटो ने बताया कि मामले में अब तक दर्जनों समन जारी किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा, “हम जांच में सामने आने वाले प्रत्येक सुराग की गहराई से पड़ताल करेंगे और किसी भी तथ्य को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।”
उन्होंने यह भी कहा कि कुछ व्हिसलब्लोअर्स (गोपनीय सूचना देने वाले व्यक्तियों) ने कॉग्निजेंट सहित कुछ बड़ी कंपनियों से संबंधित जानकारियां उपलब्ध कराई हैं। इन सूचनाओं के आधार पर पर्म और एच-1बी वीजा प्रक्रियाओं से जुड़े मामलों की जांच की जा रही है।
ओआईजी ने अपने बयान में कहा कि विदेशी श्रमिकों की भर्ती से जुड़े कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल उन क्षेत्रों में श्रमिकों की कमी को पूरा करना है, जहां वास्तव में आवश्यकता है। इन योजनाओं का दुरुपयोग कर श्रमिकों का शोषण करना या अमेरिकी नागरिकों के रोजगार अधिकारों को प्रभावित करना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
जांच एजेंसी ने स्पष्ट किया कि वह गेस्ट वर्कर वीजा प्रणाली के दुरुपयोग, मानव तस्करी, जबरन मजदूरी तथा श्रमिकों के शोषण से जुड़े पूरे नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है। विभाग का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं के विरुद्ध कानून के अनुसार उचित कार्रवाई की जाएगी।













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