नई दिल्ली : राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों में वायु प्रदूषण का स्तर लगातार चिंताजनक बना हुआ है। गुरुवार को दिल्ली के 20 इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 400 के पार दर्ज किया गया। जहांगीरपुरी में स्थिति सबसे खराब रही, जहां AQI 454 तक पहुंच गया। मौसम संबंधी परिस्थितियों और प्रदूषण के विभिन्न स्रोतों को देखते हुए शुक्रवार से हवा की गुणवत्ता और बिगड़ने की आशंका जताई गई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के मुताबिक, गुरुवार को दिल्ली का औसत AQI 369 दर्ज किया गया, जबकि बुधवार को यह 377 था। औसत AQI में मामूली सुधार के बावजूद कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर गंभीर श्रेणी में पहुंच गया। वायु गुणवत्ता पूर्व चेतावनी प्रणाली के पूर्वानुमान के अनुसार, 6 और 7 नवंबर को दिल्ली की हवा गंभीर श्रेणी में रह सकती है।
वाहनों और पराली के धुएं का असर
दिल्ली की हवा में प्रदूषण बढ़ने के पीछे वाहनों से निकलने वाला धुआं और पराली जलाने की घटनाएं प्रमुख कारण बने हुए हैं। गुरुवार को प्रदूषण में वाहनों की हिस्सेदारी 17.913 प्रतिशत और पराली जलाने की हिस्सेदारी 15.60 प्रतिशत दर्ज की गई। इसके अलावा औद्योगिक गतिविधियां, कचरा जलाने और आसपास के क्षेत्रों से आने वाला प्रदूषण भी राजधानी की हवा को प्रभावित कर रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, हवा की कम रफ्तार और वातावरण में नमी के कारण प्रदूषक कणों का फैलाव नहीं हो पा रहा है। सुबह के समय धुंध और कोहरे की स्थिति भी प्रदूषण को लंबे समय तक वातावरण में बनाए रखने में मदद कर रही है।
सुबह-शाम बाहर निकलने से बचने की सलाह
बढ़ते प्रदूषण का सबसे अधिक असर बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों पर पड़ सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को अनावश्यक रूप से घर से बाहर निकलने से बचने और बाहर जाते समय N95 मास्क का इस्तेमाल करने की सलाह दी है। प्रदूषण के अधिक स्तर के दौरान खुले में व्यायाम और दौड़ने से भी परहेज करने को कहा गया है।
पंजाब में पराली जलाने को लेकर सियासत तेज
दिल्ली में प्रदूषण के बढ़ते स्तर के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर पराली जलाने की घटनाओं को नियंत्रित करने में विफल रहने का आरोप लगाया है। उन्होंने इस मामले में अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग भी की है।
फिलहाल दिल्ली-NCR में प्रदूषण से तत्काल राहत मिलने की संभावना कम नजर आ रही है। आने वाले दिनों में मौसम की परिस्थितियां और प्रदूषण के स्रोत हवा की गुणवत्ता को किस स्तर तक प्रभावित करते हैं, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।













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