डेस्क : पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण को लेकर कर्नाटक सरकार ने गंभीर सवाल उठाए हैं। राज्य सरकार का दावा है कि पेट्रोल के नमूनों की जांच में निर्धारित 20 प्रतिशत की सीमा से अधिक एथनॉल पाया गया है। कुछ नमूनों में इसकी मात्रा 31.2 प्रतिशत तक दर्ज की गई। इस खुलासे के बाद पेट्रोल की गुणवत्ता और वाहनों पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर बहस तेज हो गई है।
कर्नाटक के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री रिजवान अरशद के अनुसार, राज्य के सात जिलों से पेट्रोल के कुल 14 नमूने एकत्र कर उनकी जांच कराई गई थी। जांच रिपोर्ट में 11 नमूनों में एथनॉल की मात्रा 20 प्रतिशत से अधिक पाई गई।
सरकार के मुताबिक, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के एक नमूने में 31.2 प्रतिशत और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के एक नमूने में 30.5 प्रतिशत एथनॉल मिला। वहीं, एचपीसीएल के दूसरे नमूने में 27 प्रतिशत, भारत पेट्रोलियम के स्पीड पेट्रोल में 26.5 प्रतिशत, नायरा के पेट्रोल में 26.1 प्रतिशत और शेल के पेट्रोल में 25.5 प्रतिशत एथनॉल दर्ज किया गया।
वाहनों के माइलेज पर असर की आशंका
राज्य सरकार ने निर्धारित सीमा से अधिक एथनॉल मिश्रण को वाहन मालिकों के लिए चिंता का विषय बताया है। सरकार का कहना है कि अधिक एथनॉल वाले पेट्रोल से कुछ वाहनों के माइलेज और इंजन की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा फ्यूल पंप, इंजेक्टर, फिल्टर और अन्य पुर्जों पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका जताई गई है।
सरकार का तर्क है कि देश में बड़ी संख्या में ऐसे वाहन मौजूद हैं, जिन्हें 20 प्रतिशत से अधिक एथनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल के अनुरूप तैयार नहीं किया गया है। ऐसे में ईंधन की गुणवत्ता और निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करना जरूरी है।
केंद्र से कार्रवाई और मुआवजे की मांग
कर्नाटक सरकार ने केंद्र से मामले की जांच कराने और निर्धारित मानकों का उल्लंघन करने वाली तेल कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही प्रभावित वाहन मालिकों को मुआवजा देने के लिए व्यवस्था बनाने का सुझाव दिया है।
राज्य सरकार ने पेट्रोल पंपों पर एथनॉल मिश्रण की वास्तविक मात्रा स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने और उपभोक्ताओं को ईंधन के विकल्प उपलब्ध कराने की मांग भी रखी है।
उपभोक्ताओं के अधिकारों का मुद्दा उठा
मंत्री रिजवान अरशद ने कहा कि उपभोक्ताओं को यह जानने का अधिकार है कि उनकी गाड़ी में इस्तेमाल होने वाले पेट्रोल में कितनी मात्रा में एथनॉल मिलाया गया है। सरकार ने केंद्र से इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
हालांकि, इस मामले में जांच के निष्कर्षों और राज्य सरकार के दावों पर केंद्र सरकार तथा संबंधित तेल कंपनियों की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। जांच रिपोर्ट के दावों की स्वतंत्र पुष्टि और आगे की कार्रवाई के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।













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