नई दिल्ली : गुजरात के प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर के आसपास नॉनवेज (मांसाहारी भोजन) की बिक्री और परोसने पर लगे प्रतिबंध को हटाने की मांग करने वाले रेस्टोरेंट संचालकों को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल राहत नहीं मिली है। शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को शीर्ष अदालत ने गुजरात हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। इसके साथ ही मंदिर के आसपास नॉनवेज खाद्य पदार्थों की तैयारी, बिक्री और भंडारण पर लगा प्रतिबंध फिलहाल जारी रहेगा।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति पीबी वराले शामिल थे, ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि इस तरह के मामलों में संतुलन बनाए रखना जरूरी है। अदालत ने गुजरात हाईकोर्ट से मामले की सुनवाई में तेजी लाने और अपील पर जल्द फैसला करने का अनुरोध किया है। शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट से दो महीने के भीतर मामले का निपटारा करने का प्रयास करने को कहा है।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, गुजरात के जिला प्रशासन ने 10 अगस्त 2026 को एक अधिसूचना जारी कर सोमनाथ मंदिर के आसपास निर्धारित क्षेत्रों में मांसाहारी भोजन की तैयारी, बिक्री और भंडारण पर रोक लगाई थी। इस प्रतिबंध में मंदिर के 500 मीटर के दायरे के अलावा कुछ अन्य निर्धारित सड़क मार्ग और इलाके भी शामिल हैं।
इस फैसले को स्थानीय रेस्टोरेंट संचालकों ने गुजरात हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उनका तर्क था कि उनके प्रतिष्ठान पिछले कई दशकों से संचालित हो रहे हैं और इस प्रतिबंध से उनके कारोबार तथा वहां काम करने वाले कर्मचारियों की आजीविका प्रभावित होगी।
30 अक्टूबर को गुजरात हाईकोर्ट की एकल पीठ ने रेस्टोरेंट संचालकों की याचिका स्वीकार करते हुए प्रतिबंध से संबंधित अधिसूचना को रद्द कर दिया था। हालांकि, राज्य सरकार की अपील पर उसी दिन हाईकोर्ट की खंडपीठ ने एकल पीठ के आदेश पर रोक लगा दी और प्रतिबंध को फिर से प्रभावी कर दिया।
रेस्टोरेंट संचालकों ने क्या दलील दी?
सुप्रीम कोर्ट में रेस्टोरेंट संचालकों की ओर से दलील दी गई कि देश की बड़ी आबादी मांसाहारी भोजन करती है और किसी व्यक्ति की खानपान संबंधी पसंद को इस तरह प्रतिबंधित नहीं किया जाना चाहिए। वकील ने कहा कि इस फैसले से वर्षों से कारोबार कर रहे प्रतिष्ठानों का व्यवसाय प्रभावित हो रहा है।
वहीं, गुजरात सरकार की ओर से प्रतिबंध का समर्थन करते हुए कहा गया कि मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं और सुविधा को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित क्षेत्रों में शाकाहारी भोजन परोसने की अनुमति है।
‘दिवाली मिठाई खाकर मनाइए’
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि इस मामले में संतुलन बनाए रखना जरूरी है। पीठ ने कहा, “हमें संतुलन बनाए रखना होगा। हम इस स्तर पर कुछ नहीं कहना चाहते।”
सुनवाई के दौरान अदालत ने हल्के-फुल्के अंदाज में यह भी कहा कि दिवाली का त्योहार मिठाई खाकर मनाइए, शाकाहारी या मांसाहारी भोजन की बात छोड़ दीजिए।
अब गुजरात हाईकोर्ट में होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल प्रतिबंध हटाने से इनकार करते हुए मामले के अंतिम फैसले की जिम्मेदारी गुजरात हाईकोर्ट पर छोड़ दी है। अदालत ने हाईकोर्ट से अपील पर दो महीने के भीतर फैसला करने का प्रयास करने को कहा है।
फिलहाल सोमनाथ मंदिर के आसपास निर्धारित क्षेत्रों में नॉनवेज भोजन की तैयारी, बिक्री और भंडारण पर प्रतिबंध जारी रहेगा। इस मामले में गुजरात हाईकोर्ट का अंतिम फैसला आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि प्रतिबंध आगे भी बरकरार रहेगा या इसमें कोई बदलाव किया जाएगा।













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