बजट का दिन हमेशा से ही सभी सरकारों के लिए खास रहा है। देश में इतिहास रहा है कि जब भी पेश किया जाता है, तो वित्त मंत्री अपनी बात को सदन के अन्य नेताओं और जनता तक बेहतर ढंग से पहुंचाने के लिए प्रसिद्ध कवियों की पंक्तियों का सहारा लेते हैं, जिनके बारे में आज हम अपनी इस रिपोर्ट में बताएंगे।
बता दें, मौजूदा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी बजट के दौरान बात को रखने के लिए ऐसा करती रही हैं, जो कि इस एक फरवरी को बजट 2023 पेश करेंगी।
मनमोहन सिंह (1991):-पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव सरकार में तत्कालीन वित्त मंत्री रहे मनमोहन सिंह की ओर से 1991 में पेश किए गए बजट को काफी ऐतिहासिक माना जाता है। उन्होंने इस बजट में देश को संकट से निकालने के लिए निजीकरण और उदारीकरण जैसे निर्णय को लागू किया था। इसको समझाने के लिए फ्रेंच लेखक विक्टर ह्यूगो की पंक्ति का उपयोग किया था। एक बार ह्यूगो की ओर से कहा गया था कि धरती के उस विचार को रोक नहीं जा सकता है, जिसका समय आ चुका है। इसका इस्तेमाल करते हुए सिंह ने कहा कि पूरी दुनिया को जान लेना चाहिए कि भारत जाग चुका है। हम जीतेंगे और मुश्किलों से निजात पाएंगे।
यशवंत सिन्हा (2001):-अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में वित्त मंत्री यशवंत सिंहा की ओर से बजट भाषण के दौरान की गई शायरी को काफी याद किया जाता है, जिसमें उन्होंने कहा था कि तकाजा है वक्त का कि तूफान से जूझो, कहां तक चलोगे किनारे-किनारे?
अरुण जेटली (2017):-2017 के बजट भाषण के दौरान पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली की ओर से यूपीए सरकार में लिए गए खराब फैसलों की आलोचना के लिए उपयोग की गई पंक्ति उस समय काफी लोकप्रिय हुई थी। इस दौरान उन्होंने कहा था कि कश्ती चलाने वालों ने जब हारकर दी पतवार हमें, लहर-लहर तूफान मिले और मौज-मौज मझदार मुझे।
निर्मला सीतारमण (2021):-कोरोना महामारी के दौरान 2021 में बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रवींद्र नाथ टैगोर की पंक्तियों को बोलते हुए कहा था कि विश्वास वह चिडिया है जो तब रोशनी का अहसास करती है और गीत गुनगुनाती है, जब सुबह से पहले रात का अंधेरा छट रहा होता है।













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