डेस्क : पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की अंदरूनी कलह ने नया मोड़ ले लिया है। पार्टी के भीतर बढ़ती असंतोष की आवाजों के बीच बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले समूह ने दावा किया है कि उसे टीएमसी के 58 विधायकों का समर्थन प्राप्त है। इसी आधार पर ऋतब्रत बनर्जी को पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता मिलने की भी चर्चा है।
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, बागी खेमे के साथ जाने वाले विधायकों में विभिन्न सामाजिक और क्षेत्रीय समूहों का प्रतिनिधित्व करने वाले विधायक शामिल हैं। इनमें कई मुस्लिम विधायक भी बताए जा रहे हैं, जिससे यह संकेत मिल रहा है कि पार्टी के भीतर समर्थन का समीकरण तेजी से बदल रहा है। बताया जा रहा है कि कई नेता और विधायक धीरे-धीरे विद्रोही गुट के साथ खड़े होते जा रहे हैं।
पार्टी के भीतर बढ़ती गुटबाजी और असंतोष को देखते हुए तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व ने हाल ही में संगठन की विभिन्न समितियों और प्रकोष्ठों को भंग करने का निर्णय लिया है। राजनीतिक जानकार इसे संगठनात्मक ढांचे को पुनर्गठित करने तथा पार्टी पर केंद्रीय नेतृत्व की पकड़ मजबूत करने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा चुनाव में सत्ता से बाहर होने के बाद टीएमसी लगातार संगठनात्मक चुनौतियों का सामना कर रही है। मौजूदा घटनाक्रम ने पार्टी नेतृत्व के सामने नई राजनीतिक और संगठनात्मक चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। आने वाले दिनों में बागी खेमे की रणनीति और पार्टी नेतृत्व की प्रतिक्रिया पश्चिम बंगाल की राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।













देश
राज्य-शहर
विदेश
बिजनेस
मनोरंजन
जीवंत