डेस्क : भारतीय सिनेमा की कालजयी फिल्म शोले के निर्देशक रमेश सिप्पी ने खुलासा किया है कि फिल्म का मूल अंत दर्शकों तक कभी पहुंच ही नहीं पाया। सेंसर बोर्ड की आपत्तियों के कारण उन्हें फिल्म का क्लाइमैक्स बदलना पड़ा था।
एक हालिया बातचीत में रमेश सिप्पी ने बताया कि उन्होंने शोले का एक अलग अंत फिल्माया था, जिसमें ठाकुर बलदेव सिंह स्वयं गब्बर सिंह को मार देता है। हालांकि तत्कालीन सेंसर बोर्ड ने इस दृश्य को अत्यधिक हिंसक मानते हुए मंजूरी देने से इनकार कर दिया। इसके बाद फिल्म के अंतिम हिस्से को दोबारा शूट करना पड़ा।
सिप्पी के अनुसार, मूल दृश्य में ठाकुर अपने परिवार की हत्या का बदला लेते हुए गब्बर को मौत के घाट उतार देता है। लेकिन सेंसर बोर्ड का मानना था कि कानून अपने हाथ में लेने का ऐसा चित्रण उचित संदेश नहीं देगा। इसी कारण फिल्म के अंत में पुलिस को पहुंचते हुए दिखाया गया और गब्बर को गिरफ्तार कर लिया गया।
निर्देशक ने कहा कि वह इस बदलाव से पूरी तरह संतुष्ट नहीं थे, लेकिन फिल्म को रिलीज करने के लिए उन्हें बोर्ड के निर्देशों का पालन करना पड़ा। उस समय देश में आपातकाल का दौर था और फिल्मों में हिंसा को लेकर सेंसर बोर्ड काफी सख्त रुख अपनाए हुए था।
वर्ष 1975 में रिलीज हुई शोले में अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र, हेमा मालिनी, जया बच्चन, संजीव कुमार और अमजद खान ने प्रमुख भूमिकाएं निभाई थीं। यह फिल्म आज भी भारतीय सिनेमा की सबसे लोकप्रिय और प्रभावशाली फिल्मों में गिनी जाती है।













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