डेस्क : केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पूरी ने कह है कि वैश्विक ऊर्जा संकट और भू-राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हुई वृद्धि दुनिया के अधिकांश देशों की तुलना में बहुत कम रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने आम उपभोक्ताओं को राहत देने और महंगाई को नियंत्रित रखने के लिए ईंधन कीमतों को यथासंभव संतुलित बनाए रखा है।
नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने कहा कि कई देशों में ईंधन कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला है, जबकि भारत उन देशों में शामिल है जहां पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अपेक्षाकृत सबसे कम वृद्धि हुई है। उन्होंने दावा किया कि ईंधन आपूर्ति और मूल्य नियंत्रण के मामले में भारत की स्थिति कई विकसित देशों की तुलना में बेहतर रही है।
मंत्री ने बताया कि सरकार ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए वैकल्पिक ईंधनों को बढ़ावा दे रही है। इसी दिशा में देशभर में एथेनॉल आधारित ईंधन अवसंरचना का विस्तार किया जा रहा है। दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, पुणे और नागपुर जैसे क्षेत्रों में एथेनॉल ईंधन स्टेशनों की संख्या बढ़ाने की योजना बनाई गई है, जिससे आयातित जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम होगी।
हालांकि हाल के महीनों में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण सरकारी तेल विपणन कंपनियों पर वित्तीय दबाव बढ़ा है। इसके बावजूद सरकार उपभोक्ताओं पर बोझ कम रखने का प्रयास कर रही है। उद्योग सूत्रों के अनुसार, तेल कंपनियां अभी भी लागत और खुदरा बिक्री मूल्य के बीच अंतर के कारण नुकसान झेल रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो ईंधन मूल्य निर्धारण को लेकर आगे भी चुनौतियां बनी रह सकती हैं। फिलहाल सरकार ऊर्जा स्रोतों के विविधीकरण और जैव ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देकर दीर्घकालिक समाधान तलाश रही है।













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