डेस्क: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्विट्जरलैंड पर टैरिफ बढ़ाए जाने के फैसले के पीछे की वजह सार्वजनिक करते हुए कहा है कि स्विस नेता के साथ हुई बातचीत उन्हें पसंद नहीं आई थी। ट्रंप के मुताबिक, स्विट्जरलैंड की ओर से बार-बार ‘छोटा देश’ होने का हवाला देकर टैरिफ में राहत की मांग की जा रही थी।
फॉक्स न्यूज को दिए साक्षात्कार में ट्रंप ने स्विस फेडरल काउंसिल की सदस्य कैरिन कैलर सटर से हुई बातचीत का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने स्विस नेता को स्पष्ट कर दिया था कि भले ही स्विट्जरलैंड छोटा देश हो, लेकिन अमेरिका के साथ उसका 42 अरब डॉलर का व्यापार घाटा (ट्रेड डेफिसिट) है।
ट्रंप ने बताया, “मैंने 30 प्रतिशत टैरिफ लगाया था, जो काफी कम था। इसके बाद मुझे एक कॉल आया, जो मुझे लगा कि स्विट्जरलैंड की प्रधानमंत्री का है। वह बहुत आक्रामक तरीके से, हालांकि विनम्र भाषा में बात कर रही थीं। उन्होंने कहा कि हम एक छोटा देश हैं और इतना टैरिफ वहन नहीं कर सकते। वह बार-बार यही बात दोहरा रही थीं और फोन रखने के लिए तैयार नहीं थीं।”
उन्होंने आगे कहा कि बातचीत का लहजा उन्हें उचित नहीं लगा। “जिस तरह से उन्होंने मुझसे बात की, वह मुझे पसंद नहीं आया। ऐसे में रियायत देने के बजाय मैंने टैरिफ 30 प्रतिशत से बढ़ाकर 39 प्रतिशत कर दिया,” ट्रंप ने कहा। उन्होंने यह भी दावा किया कि स्विट्जरलैंड अपने उत्पाद अमेरिका में निर्यात कर रहा था, लेकिन किसी प्रकार का टैरिफ नहीं दे रहा था।
दावोस में भी किया था उल्लेख
इससे पहले दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान भी ट्रंप ने स्विस नेता से बातचीत का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि उन्हें यह स्पष्ट नहीं था कि कॉल राष्ट्रपति का था या प्रधानमंत्री का, लेकिन एक महिला नेता लगातार टैरिफ का विरोध कर रही थीं और छोटे देश होने का हवाला दे रही थीं।
हालांकि उल्लेखनीय है कि स्विट्जरलैंड में न तो प्रधानमंत्री होता है और न ही कार्यकारी राष्ट्रपति। वहां सरकार का नेतृत्व सात सदस्यीय फेडरल काउंसिल करती है, जो सामूहिक रूप से निर्णय लेती है।
भारत के साथ नई ट्रेड डील
इस बीच अमेरिका ने भारत के साथ एक नए व्यापार समझौते की घोषणा की है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर बताया कि भारत और अमेरिका एक ट्रेड डील पर सहमत हुए हैं, जिसके बाद भारत पर लागू टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है।
टैरिफ नीति को लेकर ट्रंप प्रशासन के हालिया फैसलों ने वैश्विक व्यापारिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।













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