डेस्क : महाराष्ट्र के हालिया नगर निकाय चुनावों में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने आंतरिक कलह और टिकट वितरण को लेकर उठे विवादों के बावजूद प्रभावशाली प्रदर्शन किया है। असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली पार्टी ने पूरे राज्य में कुल 126 सीटें जीतकर पिछले चुनावों की तुलना में बड़ी बढ़त दर्ज की है। यह नतीजे पार्टी की संगठनात्मक मजबूती और शहरी व अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में उसके बढ़ते प्रभाव को दर्शाते हैं।
AIMIM को छत्रपति संभाजीनगर नगर निगम में खास सफलता मिली, जहां पार्टी ने 33 सीटों पर जीत हासिल की। यह 2015 के नगर निगम चुनावों में मिली 24 सीटों के मुकाबले बड़ा उछाल है। इस बार पार्टी ने न केवल सीटों की संख्या बढ़ाई, बल्कि कई शहरी इलाकों में अपनी राजनीतिक पकड़ भी मजबूत की है।
राज्यभर में AIMIM की बढ़त
नगर निकाय चुनावों में AIMIM ने विभिन्न शहरों में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। पार्टी ने मालेगांव में 21, नांदेड़ वाघाला में 14, अमरावती में 12, धुले में 10, सोलापुर और मुंबई में 8-8, नागपुर में 6, ठाणे में 5, अकोला में 3, जबकि अहिल्यानगर और जालना में 2-2 सीटें जीतीं। यह परिणाम दर्शाते हैं कि AIMIM अब सीमित क्षेत्रों तक सिमटी पार्टी नहीं रह गई है।
‘सिर्फ मुस्लिम पार्टी’ की धारणा टूटी : इम्तियाज जलील
चुनावी नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए AIMIM के महाराष्ट्र अध्यक्ष और पूर्व सांसद सैयद इम्तियाज जलील ने कहा कि इन परिणामों ने AIMIM को केवल एक समुदाय की पार्टी मानने की धारणा को तोड़ दिया है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, जलील ने कहा कि AIMIM के टिकट पर हिंदू, अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) समुदाय के उम्मीदवार भी जीतकर आए हैं। उन्होंने छत्रपति संभाजीनगर के गुलमंडी वार्ड का उदाहरण देते हुए बताया कि पारंपरिक रूप से शिवसेना-भाजपा का गढ़ माने जाने वाले इस इलाके में AIMIM ने चार में से दो सीटें जीती हैं।
नगर निकायों में मुद्दा-आधारित समर्थन
पार्टी की आगे की रणनीति पर बात करते हुए जलील ने स्पष्ट किया कि AIMIM नगर निकायों में जनहित से जुड़े मुद्दों पर भाजपा को समर्थन देगी, लेकिन ऐसे किसी भी फैसले का कड़ा विरोध करेगी जो नागरिकों के हितों के खिलाफ होगा।
आंतरिक संकट के बीच मिली सफलता
AIMIM का यह प्रदर्शन इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि चुनाव से पहले पार्टी गंभीर आंतरिक संकट से गुजर रही थी। छत्रपति संभाजीनगर में 2015 में चुने गए 24 पार्षदों में से 21 के टिकट काटे जाने के फैसले के बाद पार्टी में भारी असंतोष फैल गया था। विरोध-प्रदर्शन हुए, कई नेताओं ने इस्तीफे दे दिए। हालात संभालने के लिए AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और उनके भाई, विधायक अकबरुद्दीन ओवैसी को स्वयं हस्तक्षेप करना पड़ा।
छत्रपति संभाजीनगर में कांग्रेस का लगभग सफाया
इन चुनावों में कांग्रेस को छत्रपति संभाजीनगर में करारी हार झेलनी पड़ी। पार्टी ने जिन 71 सीटों पर चुनाव लड़ा, उनमें से 70 पर उसे हार मिली। कांग्रेस की इकलौती विजेता मलेका हबीब कुरैशी रहीं, जिन्होंने AIMIM उम्मीदवार के खिलाफ कड़े मुकाबले में अपनी सीट बचाई। 2015 में कांग्रेस को यहां 11 सीटें मिली थीं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस हार के पीछे कांग्रेस की कमजोर चुनावी रणनीति और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के बीच खुद को एक प्रभावी विकल्प के रूप में पेश न कर पाना प्रमुख कारण रहे।












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