ब्रातिस्लावा : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में व्यापक सुधारों तथा वैश्विक संस्थाओं को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण और प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। दोनों नेताओं ने यूएनएससी के स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में विस्तार का समर्थन करते हुए बहुपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई।
सोमवार को जारी भारत-स्लोवाकिया संयुक्त वक्तव्य के अनुसार, स्लोवाकिया ने एक बार फिर सुधारित और विस्तारित सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के प्रति अपना समर्थन दोहराया। दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र सहित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठनों में अपनी-अपनी उम्मीदवारी को लेकर परामर्श और समन्वय जारी रखने पर सहमति व्यक्त की।
वार्ता के दौरान दोनों नेताओं ने वर्तमान भू-राजनीतिक परिस्थितियों के अनुरूप संयुक्त राष्ट्र और उसकी संस्थाओं में व्यापक सुधारों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वैश्विक संस्थाओं को अधिक समावेशी, प्रतिनिधित्वपूर्ण और प्रभावी बनाया जाना चाहिए।
बैठक में वैश्विक परमाणु अप्रसार व्यवस्था को बनाए रखने और मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। इस दौरान स्लोवाकिया ने परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) की सदस्यता के लिए भारत के प्रयासों के प्रति अपना “रचनात्मक दृष्टिकोण” दोहराया। 48 सदस्यीय एनएसजी वैश्विक परमाणु व्यापार को विनियमित करने वाला एक महत्वपूर्ण समूह है, जिसका उद्देश्य परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकना है।
दोनों देशों ने क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए स्लावकोव-3, वाइशेग्राद-4 और थ्री सीज़ इनिशिएटिव जैसे क्षेत्रीय समूहों के साथ सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति व्यक्त की। इसके तहत संपर्क, सतत आर्थिक विकास और क्षेत्रीय एकीकरण को मजबूत करने वाले बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को समर्थन देने का निर्णय लिया गया।
प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री फिको ने अंतरराष्ट्रीय कानून, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान पर आधारित स्वतंत्र, खुला, शांतिपूर्ण और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (यूएनसीएलओएस) के पालन के महत्व को भी रेखांकित किया।
इस बीच, विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने संयुक्त राष्ट्र सुधारों पर भारत के रुख को दोहराते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र अभी भी अतीत की संरचना में अटका हुआ है और उसे वर्तमान वैश्विक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र और संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में महत्वपूर्ण योगदानकर्ता के रूप में भारत का सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्य बनना समय की आवश्यकता है।













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