काहिरा : गृहयुद्ध से जूझ रहे अफ्रीकी देश Sudan में ड्रोन हमले आम नागरिकों के लिए सबसे बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार वर्ष 2026 के पहले पांच महीनों में ड्रोन हमलों में 1,000 से अधिक नागरिकों की जान जा चुकी है, जिससे युद्ध की भयावहता और बढ़ गई है।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त Volker Türk ने जिनेवा में मानवाधिकार परिषद को संबोधित करते हुए कहा कि सूडान में ड्रोन युद्ध के इस्तेमाल में तेज वृद्धि दर्ज की गई है। उनके अनुसार जनवरी से मई 2026 के बीच ड्रोन हमलों में एक हजार से अधिक नागरिक मारे गए हैं। साथ ही यौन हिंसा और बलात्कार की घटनाओं में भी चिंताजनक बढ़ोतरी हुई है।
सूडान में संघर्ष अप्रैल 2023 में सेना और अर्धसैनिक संगठन Rapid Support Forces के बीच सत्ता संघर्ष के कारण शुरू हुआ था। तीन वर्षों से जारी इस युद्ध ने देश को गहरे मानवीय संकट में धकेल दिया है। संघर्ष निगरानी संस्था एसीएलईडी के अनुसार अब तक कम से कम 59,000 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 में ड्रोन हमलों से होने वाली मौतों में 600 प्रतिशत और ड्रोन हमलों की संख्या में 81 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। हाल के दिनों में अस्पतालों, स्कूलों, बाजारों, विस्थापितों के शिविरों और अन्य नागरिक ढांचों को भी निशाना बनाया गया है। पिछले सप्ताह मध्य सूडान के एल-ओबैद शहर में एक कब्रिस्तान और पेट्रोल पंप पर हुए ड्रोन हमले में कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई थी।
संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि यह संघर्ष दुनिया के सबसे बड़े मानवीय संकटों में बदल चुका है। देश की लगभग 3.4 करोड़ आबादी को तत्काल मानवीय सहायता की आवश्यकता है। मानवाधिकार संगठनों ने चेतावनी दी है कि युद्ध के दौरान सामूहिक बलात्कार, जातीय आधार पर हत्याएं और नागरिकों को निशाना बनाए जाने जैसी घटनाएं युद्ध अपराध और मानवता के विरुद्ध अपराध की श्रेणी में आती हैं।













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