डेस्क : भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़े ऑपरेशन के तहत सात विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। इनमें छह यूक्रेनी और एक अमेरिकी नागरिक शामिल हैं। आरोप है कि ये सभी भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों की साजिश रच रहे थे।
अवैध गतिविधियों के गंभीर आरोप
अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों ने मिजोरम के प्रतिबंधित क्षेत्रों में बिना अनुमति प्रवेश किया और म्यांमार की सीमा पार की। इसके अलावा, उन्होंने म्यांमार के जातीय सशस्त्र समूहों को प्रशिक्षण देने और विद्रोहियों से जुड़े नेटवर्क को अवैध रूप से ड्रोन भेजने का काम किया।
कौन हैं ये विदेशी नागरिक?
नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरॉन वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार यूक्रेनी नागरिकों की पहचान इस प्रकार है: पेट्रो हुर्बा, तारास स्लीवियाक, इवान सुकमानोव्स्की, मारियन स्टेफ़ानकिव, मैक्सिम होनचारुक और विक्टर कामिंस्की।
गिरफ्तारी प्रक्रिया काफी व्यापक रही और यह तीन अलग-अलग हवाई अड्डों पर हुई। अमेरिकी नागरिक वैनडाइक को कोलकाता एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया। वहीं, लखनऊ और दिल्ली एयरपोर्ट से तीन-तीन यूक्रेनी नागरिकों को हिरासत में लिया गया। सभी आरोपियों को दिल्ली लाया गया और उन्हें प्रारंभिक रूप से तीन दिन की रिमांड पर भेजा गया। सोमवार को उनकी हिरासत अवधि 27 मार्च तक बढ़ा दी गई। सभी को मुख्य रूप से गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की धारा 18 और अन्य संबंधित धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
अमेरिकी दूतावास ने कहा कि वे स्थिति से अवगत हैं, लेकिन प्राइवेसी कारणों से अमेरिकी नागरिक से जुड़े मामलों पर कोई विस्तृत टिप्पणी नहीं करेंगे। वहीं, यूक्रेन के विदेश मंत्रालय ने छह नागरिकों की गिरफ्तारी की पुष्टि की और बताया कि उनके परिजन लगातार हिरासत में लिए गए नागरिकों से संपर्क में हैं।
साजिश का तरीका और प्रशिक्षण
जांच में सामने आया कि छह यूक्रेनी नागरिक अपने देश के 14 सदस्यीय एक समूह का हिस्सा थे। ये सभी टूरिस्ट वीजा पर भारत आए और गुवाहाटी पहुंचे। इसके बाद उन्होंने बिना आवश्यक दस्तावेजों के मिजोरम में प्रवेश किया। अमेरिकी नागरिक कब इस समूह में शामिल हुआ, अभी स्पष्ट नहीं है।
अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों ने म्यांमार में अवैध प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए और जातीय सशस्त्र समूहों को ड्रोन युद्ध, असेंबली और जैमिंग तकनीक का प्रशिक्षण दिया। इसके लिए यूरोप से भारी मात्रा में ड्रोन अवैध रूप से मंगाए गए।
पूछताछ में अहम खुलासे
NIA ने कोर्ट में बताया कि आरोपियों ने पूछताछ में स्वीकार किया कि वे AK-47 राइफल लेकर चलने वाले अज्ञात आतंकवादियों के संपर्क में थे और उनकी गतिविधियों में मदद कर रहे थे। उन्होंने कई बार म्यांमार में प्रशिक्षण शिविर चलाने और ड्रोन सप्लाई करने की बात कबूल की। इसके अलावा, उन्होंने भारत में सक्रिय कुछ प्रतिबंधित विद्रोही समूहों को हथियार और हार्डवेयर सप्लाई करने की भी बात स्वीकार की।
रिमांड की आवश्यकता
NIA का कहना है कि पूरी साजिश का पर्दाफाश करने, घुसपैठ के रास्तों का पता लगाने और फरार साथियों को पकड़ने के लिए आरोपियों से आगे पूछताछ जरूरी है। गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन CERT-IN को भेजे गए हैं ताकि सोशल मीडिया और डेटा के माध्यम से मुख्य साजिशकर्ता और फंडिंग के स्रोतों का पता लगाया जा सके।
यह मामला भारत की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के दृष्टिकोण से बेहद संवेदनशील माना जा रहा है।













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